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यूपी न्यूज: अलीगंज अग्निकांड के बाद पुराने रिकॉर्ड पर सवाल, 2016 में जारी ध्वस्तीकरण आदेश दो माह में ही हुआ था निरस्त यूपी न्यूज:अलीगंज अग्निकांड पर सीएम योगी का बड़ा एक्शन, 4 आरोपी गिरफ्तार, 4 अफसर सस्पेंड Ayodhya news: अयोध्या में अवैध बस स्टैंडों पर कार्रवाई, 29 बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों का चालान यूपी न्यूज: अलीगंज अग्निकांड पर सख्त हुए सीएम योगी, घटनास्थल और अस्पताल पहुंचकर लिया जायजा, मृतकों के परिजनों को 5 लाख की सहायता यूपी न्यूज:प्रदेश में सड़क सुरक्षा व्यवस्था को मिलेगा नया आधार- परिवहन आयुक्त यूपी न्यूज:जनता दर्शन में सख्त दिखे मुख्यमंत्री योगी,अतिक्रमण पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश
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यूपी न्यूज: अलीगंज अग्निकांड के बाद पुराने रिकॉर्ड पर सवाल, 2016 में जारी ध्वस्तीकरण आदेश दो माह में ही हुआ था निरस्त

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लखनऊ,23जून(चौथा प्रहरी)। राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में सोमवार को हुए भीषण अग्निकांड के बाद अब भवन से जुड़े पुराने रिकॉर्ड चर्चा में हैं। जिस भवन में यह हादसा हुआ, उसके खिलाफ वर्ष 2016 में अवैध निर्माण को लेकर ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया था। हालांकि, हैरानी की बात यह है कि आदेश जारी होने के दो माह से भी कम समय में उसे निरस्त कर दिया गया था। अब इस पुराने फैसले पर सवाल उठने लगे हैं।

अलीगंज अग्निकांड के बाद विवादों में आया भवन और उससे जुड़ी पुरानी प्राधिकरण कार्रवाई
जानकारी के अनुसार, अलीगंज योजना के सेक्टर-डी स्थित भवन संख्या एमएस/102/डी का आवंटन 11 जुलाई 1980 को लॉटरी प्रणाली के तहत विजय कुमार पुत्र रामेश्वर सहाय के नाम हुआ था। यह आवंटन किराया-क्रय पद्धति पर किया गया था। 4 नवंबर 1980 को अनुबंध पूरा होने के बाद भवन का कब्जा आवंटी को दे दिया गया।
बाद में वर्ष 2005 में यह भवन विक्रय विलेख के माध्यम से विजय कुमार और उनकी पत्नी उषा के नाम दर्ज हुआ। इसके बाद 19 जनवरी 2013 को दोनों ने यह संपत्ति वीरेन्द्र प्रताप शुक्ला और सुरेन्द्र प्रताप शुक्ला को बेच दी। 7 अगस्त 2014 को लखनऊ विकास प्राधिकरण ने नए मालिकों के पक्ष में नामांतरण की प्रक्रिया पूरी कर दी।
करीब 1992 वर्गफीट क्षेत्रफल वाले इस भवन का मानचित्र 20 अगस्त 2014 को स्वतः मानचित्र योजना के तहत आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत किया गया था। लेकिन बाद में भवन में अनधिकृत निर्माण की शिकायतें सामने आईं।
इन शिकायतों के आधार पर लखनऊ विकास प्राधिकरण ने वीरेन्द्र प्रताप शुक्ला के खिलाफ मुकदमा संख्या 08/2016 दर्ज किया। मामले की जांच के बाद विहित प्राधिकारी ने 10 मई 2016 को अवैध निर्माण के खिलाफ ध्वस्तीकरण का आदेश पारित कर दिया।
हालांकि, यह आदेश लंबे समय तक प्रभावी नहीं रहा। रिकॉर्ड के अनुसार, 5 जुलाई 2016 को ध्वस्तीकरण आदेश निरस्त कर दिया गया। यानी आदेश जारी होने के दो माह से भी कम समय में उसे वापस ले लिया गया। अब अलीगंज अग्निकांड के बाद यह सवाल उठ रहा है कि ध्वस्तीकरण आदेश किन परिस्थितियों में निरस्त किया गया था और उस समय क्या आधार माना गया था।
अग्निकांड के बाद भवन की स्थिति और उससे जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रियाएं जांच के दायरे में आ सकती हैं। पुराने रिकॉर्ड सामने आने से मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों की अनदेखी सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार पक्षों की भूमिका भी जांच के घेरे में आ सकती है।
भविष्य में इस मामले की जांच न केवल अग्निकांड के कारणों को समझने में मदद करेगी, बल्कि यह भी स्पष्ट कर सकती है कि भवन निर्माण और निगरानी से जुड़े नियमों का पालन किस स्तर तक हुआ था। इससे शहर में अवैध निर्माणों पर कार्रवाई और निगरानी को लेकर भी नई चर्चा शुरू होने की संभावना है।

VINAY PRAKASH SINGH
Author: VINAY PRAKASH SINGH

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