लखनऊ,चौथा प्रहरी 11 दिसम्बर।प्रदेश में सूचना, शिक्षा एवं संचार गतिविधियों के प्रभावी उपयोग के माध्यम से सशक्त एवं सृजनात्मक स्वास्थ्य संदेशों का व्यापक प्रसार सुनिश्चित करते हुए विभिन्न आयुवर्ग के हितधारकों में जागरुकता बढ़ाने तथा शासन की स्वास्थ्य सेवाओं की सार्वभौमिक पहुंच को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से गुरुवार को एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता अमित कुमार घोष अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण व चिकित्सा शिक्षा विभाग ने किया। कार्यशाला में मिशन निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तर प्रदेश डॉ0 पिंकी जोवल, महानिदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य तथा महानिदेशक, परिवार कल्याण ने प्रतिभाग किया। कार्यशाला का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।
इफेक्टिव इम्पलीमेंटेशन आफ आईईसी/बीसीसी प्लान टू प्रमोट हेल्थी बिहेवियर विषय पर आयोजित कार्यशाला में अपर मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने तथा जन-जन तक स्वास्थ्य संबंधी जानकारी पहुंचाने एवं बीमारियों की रोकथाम में आईईसी गतिविधियों की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है। सहयोगी संस्थाओं के समन्वित प्रयास से विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों के लक्ष्यों को प्रभावी रूप से प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने टीकाकरण कार्यक्रम का उदाहरण देते हुए कहा कि हमें प्रदेश के उन क्षेत्रों में प्रभात फेरी, नुक्कड़ नाटक एवं विद्यालयो से संपर्क जैसी गतिविधियों के माध्यम से उन स्वास्थ्य लाभार्थी तक पहुंचना है जो टीकाकरण के लाभ से अब तक वंचित हैं। इस क्रम में उन्होंने अन्य स्वास्थ्य कार्यक्रमों की सफलता हेतु प्रचार-प्रसार किए जाने की बात कही।मिशन निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तर प्रदेश, डॉ. पिंकी जोवल ने इस अवसर पर कहा कि नवजात एवं शिशु मृत्यु दर एवं मातृ मृत्यु दर में कमी लाने, टीकाकरण, बच्चों एवं किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य तथा उनसे संबंधित स्वस्थ व्यवहारों को बढ़ावा देने, सभी आयु वर्ग में कैंसर, उच्च रक्तचाप एवं मधुमेह की रोकथाम एवं उपचार, तथा एनीमिया के बचाव इत्यादि हेतु जनसामान्य में स्वस्थ्य आदतों को अपनाने को बढ़ावा देने के लिए संचार माध्यमों का अधिकाधिक एवं प्रभावी उपयोग अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने प्रतिभागी सहयोगी संस्थाओं से भविष्य की स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं एवं प्राथमिकताओं के दृष्टिगत बेहतर संचार रणनीति में बनाने एवं क्रियान्वयन में सहयोग की अपेक्षा की। उन्होंने स्थानीय बोली/भाषा पर आधारित स्वास्थ्य संदेशों के प्रसार पर बल दिया।कार्यशाला के दौरान स्वास्थ्य जागरूकता को सुदृढ़ करने हेतु राज्य में संचालित आईईसी/बीसीसी गतिविधियों की वर्तमान प्रगति, उपलब्धियों एवं चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा की गई। साथ ही, आगामी अवधि के लिए प्रभावी रणनीतियों, अभियानों तथा कार्ययोजनाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर सहमति बनी।इस अवसर पर महानिदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य डा0 रतन पाल सिंह सुमन तथा महानिदेशक, परिवार कल्याण डा0 पवन कुमार अरूण के साथ चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सहित राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन उ0प्र0 के विभिन्न अधिकारी/कर्मचारियों के साथ ही विभिन्न सहयोगी संस्थाओं (यथा डब्ल्यू0एच0ओ0, यूनीसेफ, पी0एस0आई0, पी0सी0आई0, सी0फार, जी0एच0एस0, पी0एच0एफ0आई0, सी0के0डी0, स्मार्ट, जे0एस0आई0 आदि) के प्रतिनिधियों ने भी प्रतिभाग किया। इस आयोजन में उ0प्र0 तकनीकी सहयोग इकाई (यूपीटीएसयू) ने सहयोग किया।महाप्रबंधक आईईसी, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन डा0 अम्बुज श्रीवास्तव के द्वारा कार्यशाला के अंत में सभी आगंतुकों को धन्यवाद ज्ञापित किया गया।
Author: Chautha Prahari
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