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अविमुक्तेश्वरानंद प्रकरण पर सियासत तेज,सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता रीना एन सिंह का बयान

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नई दिल्ली,23 फरवरी, चौथा प्रहरी डेस्क।

अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े प्रकरण में विशेष पॉक्सो (POCSO) न्यायालय द्वारा मुकदमा दर्ज करने के आदेश के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। विपक्षी दलों, जिनमें समाजवादी पार्टी भी शामिल है, ने इसे सरकार के खिलाफ साजिश का मामला बताया है।

इसी बीच आरोप लगाने वाले पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे आशुतोष ब्रह्मचारी की ओर से सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता रीना एन सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यदि प्रारंभिक स्तर पर पुलिस द्वारा मुकदमा दर्ज कर लिया गया होता तो न्यायालय की शरण लेने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

क्या कहा अधिवक्ता ने?

रीना एन सिंह के अनुसार, कथित घटना 18 जनवरी 2026 की बताई जा रही है। इसके बाद संबंधित थाने और पुलिस आयुक्त को प्रार्थना पत्र दिया गया, लेकिन कार्रवाई न होने पर पीड़ित पक्ष को अदालत का रुख करना पड़ा। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया मामला दर्ज करने का आदेश दिया है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पॉक्सो मामलों में पीड़ित की पहचान गोपनीय रखना कानूनी और संवैधानिक दायित्व है। इस प्रक्रिया को राजनीतिक या धार्मिक दृष्टिकोण से देखने के बजाय निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

विपक्षी दलों का कहना है कि यह मामला राजनीतिक प्रेरणा से जुड़ा हो सकता है, जबकि पीड़ित पक्ष के वकील का दावा है कि अगर प्रशासनिक स्तर पर समय रहते कार्रवाई होती तो अदालत जाने की नौबत नहीं आती।

आगे क्या?

मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि संवेदनशील मामलों में तथ्यों और न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करना आवश्यक है, ताकि किसी भी पक्ष के साथ अन्याय न हो।

 

VINAY PRAKASH SINGH
Author: VINAY PRAKASH SINGH

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