इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली एसएलपी पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, अधिवक्ता रीना एन. सिंह ने उठाए गंभीर सवाल
नई दिल्ली। श्री कृष्ण जन्मभूमि विवाद से जुड़े एक महत्वपूर्ण कानूनी मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 13 अप्रैल को होगी। यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें 18 जुलाई 2025 को दायर वाद संख्या 17 को प्रतिनिधि मुकदमा (Representative Suit) के रूप में स्वीकार किया गया था।

हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटिशन (SLP) दाखिल की गई है। यह याचिका हिंदू पक्ष की ओर से अधिवक्ता रीना एन. सिंह ने कौशल किशोर ठाकुर की ओर से दायर की है।
याचिका में कहा गया है कि वाद संख्या 17 को समस्त हिंदू समाज का प्रतिनिधि मुकदमा घोषित करने का निर्णय असंवैधानिक और अव्यावहारिक है। याचिकाकर्ता पक्ष का आरोप है कि इस निर्णय के माध्यम से विवाद को अनावश्यक रूप से साम्प्रदायिक रंग देने की कोशिश की जा रही है, जिससे मामले की निष्पक्ष सुनवाई प्रभावित हो सकती है।
इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में पहली सुनवाई 11 नवंबर 2025 को हुई थी। इसके बाद आज इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति विनोद चंद्रन की पीठ में हुई। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 13 अप्रैल की तारीख निर्धारित की है।
अधिवक्ता रीना एन. सिंह का कहना है कि जब से सूट नंबर 17 को इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा प्रतिनिधि वाद घोषित किया गया है, तब से मुस्लिम पक्ष की ओर से लगातार इस वाद के समर्थन में आवेदन दिए जा रहे हैं और यह आग्रह किया जा रहा है कि सूट नंबर 17 के अलावा अन्य मामलों की सुनवाई न की जाए।
उनके अनुसार यह स्थिति कई तरह के संदेह पैदा करती है और इससे श्री कृष्ण जन्मभूमि विवाद से जुड़े अन्य मामलों की सुनवाई भी प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि न्यायपालिका इस मामले में निष्पक्ष और संतुलित सुनवाई सुनिश्चित करे तथा किसी भी प्रकार के साम्प्रदायिक तनाव को बढ़ावा देने वाली परिस्थितियों से बचने के लिए उचित हस्तक्षेप करे।
उधर, सुप्रीम कोर्ट में यह मामला लंबित होने के कारण इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी संबंधित मामलों की सुनवाई की गति प्रभावित होने की बात सामने आ रही है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का आगामी फैसला श्री कृष्ण जन्मभूमि विवाद की सुनवाई की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
Author: Chautha Prahari
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