रांची, 17 मार्च 2026। झारखंड में नॉन बैंकिंग कंपनियों द्वारा कथित रूप से जनता से लिए गए धन को वापस दिलाने की मांग को लेकर सोमवार को राजधानी रांची में बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला। ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट (एआईपीएफ) और झारखंड नवनिर्माण दल के कार्यकर्ताओं ने विधानसभा मार्च करते हुए धरना दिया और मुख्यमंत्री Hemant Soren के नाम एक ज्ञापन भेजा।

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि राज्य में कई नॉन बैंकिंग और माइक्रोफाइनेंस कंपनियों ने ग्रामीण और गरीब तबकों से बड़ी मात्रा में धन एकत्र किया और बाद में लोगों को उनका पैसा वापस नहीं मिला। संगठनों का कहना है कि सरकार को इस मामले में सख्त कदम उठाकर जनता का पैसा वापस दिलाना चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान एआईपीएफ के झारखंड प्रभारी और झारखंड नवनिर्माण दल के केंद्रीय संयोजक Vijay Singh ने कहा कि जिस उम्मीद और सपने के साथ झारखंड राज्य का निर्माण हुआ था, वह आज कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कॉरपोरेट घरानों के हितों को ध्यान में रखकर नीतियां बनाई जा रही हैं, जबकि आम जनता की समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं।
विजय सिंह ने कहा कि सहारा और पल्स जैसी कई नॉन बैंकिंग कंपनियों ने गांव-गांव जाकर लोगों से निवेश के नाम पर पैसे जमा कराए और बाद में लोगों को उनका पैसा नहीं मिला। उन्होंने कहा कि संसद द्वारा वर्ष 2019 में बनाए गए Banning of Unregulated Deposit Schemes Act 2019 (बड्स एक्ट) का झारखंड में अभी तक प्रभावी ढंग से अनुपालन नहीं किया गया है। यदि इस कानून को कड़ाई से लागू किया जाए तो ऐसे मामलों पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।
एआईपीएफ की राष्ट्रीय सचिव Pushpa Oraon ने कहा कि माइक्रोफाइनेंस कंपनियों की कथित लूट से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं सबसे अधिक प्रभावित हुई हैं। कई महिलाएं कर्ज के बोझ से परेशान हैं और उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि आधुनिक सूदखोरी की इस व्यवस्था पर रोक लगाने के लिए सरकार को मजबूत कानून बनाना चाहिए।
उन्होंने यह भी मांग की कि महिलाओं को स्वरोजगार के लिए बिना गारंटी के चार प्रतिशत ब्याज दर पर 10 लाख रुपये तक का पूंजी ऋण उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और पलायन पर रोक लग सके। साथ ही उन्होंने महिलाओं के सभी कर्ज माफ करने की भी मांग उठाई।
एआईपीएफ के झारखंड प्रवक्ता Hafizur Rahman ने कहा कि झारखंड में स्थानीय युवाओं के लिए एक स्पष्ट और मजबूत स्थानीय नियोजन नीति बनाई जानी चाहिए। उनका कहना था कि राज्य से पूंजी पलायन पर रोक लगाकर उस धन को स्थानीय विकास और रोजगार सृजन में लगाया जाना चाहिए।
वहीं एआईपीएफ की राष्ट्रीय कार्य समिति सदस्य Sukra Munda ने कहा कि राज्य के कई सरकारी विभागों में बड़ी संख्या में पद खाली पड़े हैं। यदि इन पदों को शीघ्र भरा जाए तो युवाओं को रोजगार मिलेगा और प्रशासनिक व्यवस्था भी मजबूत होगी।
प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों में मनरेगा को प्रभावी रूप से लागू करने, किसानों के धान खरीद का बकाया भुगतान जल्द करने, रसोइयों का बकाया वेतन देने और गरीब परिवारों के कर्ज माफ करने जैसी मांगें भी शामिल कीं।
धरना-प्रदर्शन में आदित्य सिंह, शिवप्रसाद साहू, सीताराम उरांव, मनोज उरांव, कहरू मुंडा, बिरसा उरांव, महादेव ओहद्दार, प्रेमचंद तिग्गा, आनंद साहू, शिवचंद मांझी, रामप्रसाद शाह, बादल सिंह, लॉरेंससिया मिंज, विकी मिंज और समीना खातून समेत कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।
इस कार्यक्रम में रांची, खूंटी, सिमडेगा, पश्चिमी सिंहभूम, गुमला, लोहरदगा, गढ़वा, लातेहार, गोड्डा, हजारीबाग और रामगढ़ सहित कई जिलों से सैकड़ों की संख्या में लोग शामिल हुए।
संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती है, तो आने वाले समय में राज्यभर में बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।
Author: Chautha Prahari
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