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फरवरी में बच्चों की पोषण स्थिति में सुधार, 1.43 करोड़ बच्चों का हुआ परीक्षण

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आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों का पोषण परीक्षण करते हुए कार्यकर्ता

लखनऊ, 19 मार्च। उत्तर प्रदेश में बच्चों की पोषण स्थिति में सुधार के सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण ट्रैकर पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2026 की तुलना में फरवरी 2026 में कुपोषण से जुड़े प्रमुख संकेतकों में गिरावट दर्ज की गई है। यह सुधार राज्य सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और सतत निगरानी का परिणाम माना जा रहा है।

आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों का पोषण परीक्षण करते हुए कार्यकर्ता
सांकेतिक चित्र

आंकड़ों के अनुसार फरवरी माह में स्टंटिंग यानी नाटेपन के मामलों में लगभग 1.21 प्रतिशत की कमी आई है। वहीं अति कुपोषित श्रेणी के बच्चों की संख्या में लगभग 0.12 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इसके अलावा अंडरवेट बच्चों में भी करीब 0.61 प्रतिशत का सुधार देखने को मिला है। ये आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि राज्य सरकार बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण को लेकर गंभीरता से काम कर रही है।
बड़े पैमाने पर हुआ बच्चों का परीक्षण
प्रदेश में बच्चों की पोषण स्थिति की निगरानी के लिए बड़े स्तर पर परीक्षण अभियान चलाया गया। आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से छह वर्ष तक के बच्चों की लंबाई, वजन और आयु का आकलन किया जाता है, जिससे उनकी पोषण स्थिति का सटीक निर्धारण किया जा सके।
फरवरी 2026 में इस अभियान के तहत प्रदेशभर में 1 करोड़ 43 लाख से अधिक बच्चों का परीक्षण किया गया। यह संख्या अपने आप में दर्शाती है कि राज्य स्तर पर पोषण सुधार को लेकर कितनी व्यापक और संगठित पहल की जा रही है।
डिजिटल निगरानी से मिल रहे सकारात्मक परिणाम
प्रदेश में पोषण ट्रैकर जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग कर बच्चों की पोषण स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। इस डिजिटल प्रणाली के माध्यम से डेटा का संकलन और विश्लेषण अधिक सटीक और पारदर्शी हो गया है।
आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों द्वारा नियमित रूप से बच्चों का परीक्षण कर डेटा अपडेट किया जाता है, जिससे कुपोषण की समय रहते पहचान संभव हो पाती है। इसके आधार पर जरूरतमंद बच्चों को तुरंत पोषण सहायता और चिकित्सा हस्तक्षेप उपलब्ध कराया जा रहा है।
भविष्य में और सुधार की उम्मीद
विशेषज्ञों और अधिकारियों का मानना है कि अगर इसी तरह निरंतर निगरानी और योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन जारी रहा, तो आने वाले समय में बच्चों की पोषण स्थिति में और सुधार देखने को मिलेगा।
राज्य सरकार की यह पहल न केवल बच्चों के स्वास्थ्य को बेहतर बना रही है, बल्कि भविष्य की पीढ़ी को भी मजबूत और स्वस्थ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

Chautha Prahari
Author: Chautha Prahari

Vinay Prakash Singh Editor in Chief M.N0- 9454215946 Registration NO. UDYAM -UP-24-0043854

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