आगरा, 22 मार्च।
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार के 9 वर्ष पूरे होने के अवसर पर महिला सशक्तिकरण की दिशा में किए गए कार्यों को प्रमुखता से सामने लाया गया। आगरा में आयोजित प्रेस वार्ता में महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार मंत्री बेबी रानी मौर्य ने विभाग की उपलब्धियों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि प्रदेश में महिला सशक्तिकरण अब केवल नारा नहीं, बल्कि एक मजबूत जमीनी हकीकत बन चुका है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने महिलाओं और बच्चों के विकास को केवल योजनाओं तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे सुरक्षा, सम्मान, स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और आत्मनिर्भरता से जोड़ते हुए एक समग्र मॉडल के रूप में विकसित किया है। आज प्रदेश की महिलाएं न सिर्फ रोजगार की तलाश कर रही हैं, बल्कि खुद रोजगार सृजन में भी अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।
मंत्री ने बताया कि सरकार ने बेटी के जन्म से लेकर उसके शिक्षित और आत्मनिर्भर बनने तक की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित की है। कन्या सुमंगला योजना के तहत अब तक 26 लाख से अधिक बेटियों को लाभ दिया जा चुका है। वहीं मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के माध्यम से एक लाख से अधिक निराश्रित बच्चों को संरक्षण प्रदान किया गया है। मिशन वात्सल्य के तहत हजारों बच्चों को उनके परिवारों से मिलाया गया है, जो सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
मातृ और शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत 60 लाख से अधिक माताओं को आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रसव के लिए ₹1400 और शहरी क्षेत्रों में ₹1000 की सहायता दी जा रही है। संस्थागत प्रसव का प्रतिशत 84% से अधिक हो चुका है। इसके अलावा बच्चों में कुपोषण की स्थिति में भी गिरावट आई है। स्टंटिंग में 6.6% और अंडरवेट में 7.5% की कमी दर्ज की गई है।
महिला सुरक्षा के क्षेत्र में भी सरकार की नीतियों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। यूपी-112 का रिस्पॉन्स टाइम घटकर मात्र 6 मिनट 41 सेकंड रह गया है, जो पहले एक घंटे से अधिक हुआ करता था। महिला अपराधों में भी उल्लेखनीय कमी आई है, जिसमें बलात्कार, अपहरण और घरेलू हिंसा के मामलों में गिरावट दर्ज की गई है। प्रदेश पुलिस में महिलाओं के लिए 20% आरक्षण लागू होने के बाद अब 44 हजार से अधिक महिलाएं पुलिस बल का हिस्सा हैं।
आर्थिक सशक्तिकरण को लेकर भी सरकार ने कई प्रभावी कदम उठाए हैं। प्रदेश में एक करोड़ से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं। ‘लखपति दीदी योजना’ के तहत लाखों महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत बनी हैं। बीसी सखियों और विद्युत सखियों ने भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई है।
मंत्री ने बताया कि औद्योगिक क्षेत्रों में महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम करने की अनुमति दिए जाने से रोजगार के नए अवसर खुले हैं। महिला श्रम बल भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो 13% से बढ़कर 36% तक पहुंच गई है।
इसके अलावा आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं के मानदेय में वृद्धि का निर्णय भी लिया गया है, जो अप्रैल 2026 से लागू होगा। 1.90 लाख से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों को प्री-स्कूल के रूप में विकसित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत लाखों बेटियों का विवाह संपन्न कराया गया है।
प्रेस वार्ता के अंत में मंत्री ने कहा कि सरकार की पारदर्शी नीतियों और प्रभावी क्रियान्वयन ने प्रदेश की आधी आबादी की तस्वीर बदल दी है। “सुरक्षित नारी, सक्षम नारी, स्वावलंबी नारी” आज नए उत्तर प्रदेश की पहचान बन चुकी है।
Author: Chautha Prahari
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