विद्युत सखी राजश्री शुक्ला: यूपी में महिला सशक्तीकरण की मिसाल, ₹18 करोड़ बिजली बिल संग्रह
लखनऊ, 26 मार्च। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले की रहने वाली राजश्री शुक्ला आज महिला सशक्तीकरण की एक जीवंत मिसाल बन चुकी हैं। सीमित संसाधनों से शुरुआत करने वाली राजश्री ने अपने संघर्ष, मेहनत और सरकारी योजनाओं के सहारे “विद्युत सखी” के रूप में एक नई पहचान बनाई है। योगी आदित्यनाथ द्वारा शुरू की गई इस पहल ने न सिर्फ उन्हें रोजगार दिया, बल्कि समाज में एक सम्मानजनक स्थान भी दिलाया।
राजश्री का काम सिर्फ बिजली बिल इकट्ठा करना नहीं है, बल्कि वह ग्रामीण जीवन को सरल और डिजिटल बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। पहले जहां ग्रामीणों को बिजली बिल जमा करने के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता था, वहीं अब राजश्री घर-घर जाकर यह सेवा उपलब्ध करा रही हैं। इससे लोगों का समय बच रहा है और भुगतान भी समय पर हो रहा है।
अब तक राजश्री शुक्ला 81,000 से अधिक बिजली बिल संग्रह कर चुकी हैं और कुल ₹18 करोड़ से अधिक की राशि जमा करवा चुकी हैं। उनकी यह उपलब्धि न केवल उनकी मेहनत का परिणाम है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि ग्रामीण महिलाएं यदि सही अवसर पाएं तो आर्थिक रूप से पूरी तरह आत्मनिर्भर बन सकती हैं। आज उनकी वार्षिक आय ₹10 लाख से अधिक है, जो गांव की महिलाओं के लिए प्रेरणा का बड़ा स्रोत है।

राजश्री ‘राधा स्वयं सहायता समूह’ से जुड़ी हुई हैं। वर्ष 2021 में उन्होंने मात्र ₹30,000 की बैंक सहायता से इस कार्य की शुरुआत की थी। शुरुआती दौर में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने गांव-गांव जाकर जागरूकता अभियान चलाया, लोगों को डिजिटल भुगतान और सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी दी। धीरे-धीरे लोगों का भरोसा बढ़ा और उनकी मेहनत रंग लाने लगी।
आज स्थिति यह है कि गांव की महिलाएं स्वयं उन्हें फोन कर बिजली बिल जमा कराने में मदद मांगती हैं। उनकी ईमानदारी और सेवा भावना ने उन्हें गांव की भरोसेमंद “विद्युत सखी” बना दिया है। यह विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी बन गया है।
राजश्री शुक्ला की उपलब्धियों को राज्य स्तर पर भी सराहा गया है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम में केशव प्रसाद मौर्य ने उन्हें सम्मानित किया। इसके अलावा, 9 नवंबर 2024 को आयोजित “आकांक्षा हाट” कार्यक्रम में भी उन्हें राज्य की पांच मेधावी महिलाओं में शामिल किया गया।
उनकी सफलता यहीं नहीं रुकी। उन्हें 15 अगस्त 2024 को दिल्ली के लाल किले पर आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में विशेष आमंत्रण भी मिला, जहां वे प्रधानमंत्री के ध्वजारोहण कार्यक्रम की साक्षी बनीं। साथ ही, 14 अगस्त 2024 को ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित विशेष बैठक और भोज कार्यक्रम में भी उन्हें आमंत्रित किया गया।

राजश्री की कहानी यह बताती है कि जब सरकारी योजनाएं सही तरीके से लागू होती हैं और आम लोग उन्हें अपनाते हैं, तो समाज में वास्तविक बदलाव संभव होता है। उत्तर प्रदेश में “विद्युत सखी” पहल आज महिला सशक्तीकरण, डिजिटल इंडिया और ग्रामीण विकास का एक मजबूत मॉडल बन चुकी है।
राजश्री शुक्ला जैसी महिलाएं न केवल अपने जीवन को बदल रही हैं, बल्कि पूरे समाज को एक नई दिशा भी दे रही हैं। उनकी यह यात्रा हर उस महिला के लिए प्रेरणा है, जो आत्मनिर्भर बनने का सपना देखती है।
Author: Chautha Prahari
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