नई दिल्ली(सौरभ सोमवंशी)वि.सं.18 अप्रैल।देश में गौहत्या जैसे संवेदनशील मुद्दे पर बढ़ती बयानबाजी और राजनीति के बीच सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट और सामाजिक कार्यकर्ता रीना एन सिंह ने एक बड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि गौहत्या जैसे मामलों में केवल सोशल मीडिया पर आरोप लगाने या भावनात्मक बयान देने से कोई समाधान नहीं निकलेगा, बल्कि इसके लिए ठोस कानूनी कार्रवाई जरूरी है।
रीना एन सिंह, जो कई गौशालाओं का संचालन भी करती हैं और गाय को ‘राष्ट्र जननी’ घोषित करने के लिए लंबे समय से आंदोलन चला रही हैं, ने तथाकथित गौरक्षकों और स्वयंभू धर्मरक्षकों पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर किसी क्षेत्र में वास्तव में गौहत्या हो रही है, तो यह सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन है और इसकी सूचना तुरंत संबंधित प्रशासन को दी जानी चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाया कि जिन क्षेत्रों में गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध है, वहां अगर ऐसी घटनाएं हो रही हैं, तो स्थानीय लोग और स्वयं को समाज का रक्षक बताने वाले लोग चुप क्यों हैं। “यदि किसी गांव, कस्बे या जिले में गोहत्या हो रही है, तो वहां के नागरिकों का यह कानूनी और नैतिक दायित्व है कि वे तुरंत पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराएं,” उन्होंने कहा।
रीना एन सिंह ने इस बात पर भी चिंता जताई कि आजकल लोग गंभीर मुद्दों को केवल सोशल मीडिया तक सीमित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि केवल आरोप लगाना या वीडियो वायरल करना समस्या का समाधान नहीं है। अगर सच्चाई में कहीं अवैध गतिविधि हो रही है, तो उसके खिलाफ ठोस सबूतों के साथ एफआईआर दर्ज कराना ही सबसे प्रभावी कदम है।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जो लोग केवल बयानबाजी करते हैं और कार्रवाई से बचते हैं, उनकी निष्क्रियता भी अपराध में अप्रत्यक्ष भागीदारी मानी जा सकती है। ऐसे लोगों को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए और कानून के दायरे में रहकर काम करना चाहिए।
उत्तर प्रदेश का जिक्र करते हुए रीना एन सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य में गौहत्या पर सख्त प्रतिबंध लगाया गया है और इसके लिए कठोर कानून भी बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि इसके बावजूद कहीं घटनाएं सामने आती हैं, तो प्रशासन द्वारा कार्रवाई भी की जाती है।
हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर किसी मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती है, तो नागरिकों को चाहिए कि वे प्रशासन पर दबाव बनाएं, लेकिन इस मुद्दे को राजनीति का माध्यम न बनाएं। “धर्म और गाय जैसे विषय समाज की आस्था से जुड़े हैं, इन्हें राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए,” उन्होंने स्पष्ट किया।
रीना एन सिंह का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश के कई हिस्सों में गौहत्या को लेकर विवाद और बहस तेज हो रही है। उनके इस बयान को कानून व्यवस्था और सामाजिक जिम्मेदारी के नजरिए से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मुद्दों पर संतुलित और कानूनी दृष्टिकोण अपनाना ही समाज के लिए बेहतर है। केवल भावनात्मक प्रतिक्रियाओं के बजाय कानूनी प्रक्रिया को मजबूत करना ही स्थायी समाधान दे सकता है।

Author: Chautha Prahari
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