लखनऊ(विनय प्रकाश सिंह)19 अप्रैल। नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक को लेकर देश की राजनीति में तीखी टकराहट अब खुलकर सामने आ गई है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को राजधानी लखनऊ में प्रदेश भाजपा कार्यालय पर आयोजित प्रेस वार्ता में विपक्ष पर ऐसा हमला बोला, जिसने पूरे राजनीतिक माहौल को झकझोर दिया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संसद में विपक्ष के विरोध को “द्रौपदी चीरहरण जैसे दृश्य” की याद दिलाने वाला बताते हुए कहा कि यह व्यवहार न केवल लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि देश की नारी शक्ति के सम्मान पर सीधा आघात भी है। उनके इस बयान के बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है और बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू होने की संभावना है।
सीएम योगी ने कहा कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की दिशा में उठाया गया यह कदम ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी है, लेकिन विपक्षी दल इसे रोकने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। उन्होंने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य दलों पर आरोप लगाते हुए कहा कि ये दल महिलाओं के अधिकारों के मुद्दे पर हमेशा दोहरे मानदंड अपनाते रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष के इस रवैये को “अक्षम्य पाप” करार देते हुए कहा कि देश की महिलाएं अब पहले जैसी नहीं रहीं, वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हैं और इस तरह के व्यवहार को कभी माफ नहीं करेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि आज महिला सशक्तिकरण की बात करने वाले दलों का इतिहास महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ खड़े होने का रहा है।
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने Shah Bano Case और Triple Talaq Law का उल्लेख करते हुए विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इन मामलों में विपक्ष का रुख महिलाओं के हितों के विपरीत रहा, जबकि वर्तमान सरकार ने महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए निर्णायक कदम उठाए हैं।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता के लिए लगातार काम कर रही हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में महिलाओं को और अधिक अधिकार और अवसर प्राप्त होंगे।
इस प्रेस वार्ता में कई प्रमुख नेता भी उपस्थित रहे, जिनमें केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी मछली मंत्री डॉ संजय निषाद पंचायती राज मंत्री ओपी राजभर शामिल थे। एनडीए गठबंधन के अन्य प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने इस मुद्दे को और अधिक राजनीतिक महत्व दे दिया।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नारी शक्ति वंदन विधेयक अब केवल एक विधायी विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है, जिस पर आने वाले दिनों में सियासी टकराव और बढ़ने की पूरी संभावना है।
वहीं, यूपी के मुख्य विपक्षी दल सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की तरफ से भी मुख्यमंत्री के इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया आयी है।जिससे राजनीतिक माहौल और अधिक गरमाने के संकेत मिल रहे हैं।
Author: Chautha Prahari
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