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प्रतापगढ़ में साहित्यिक महोत्सव: कवयित्री प्रज्ञा तिवारी की दो पुस्तकों ‘बाल प्रज्ञा प्रबोधिनी’ और ‘प्रगति पथ’ का भव्य विमोचन

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लखनऊ (सौरभ सोमवंशी) 19 अप्रैल।उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में साहित्य प्रेमियों के लिए एक यादगार दिन देखने को मिला, जब जनपद सुल्तानपुर की चर्चित कवयित्री और लेखिका प्रज्ञा तिवारी की दो बहुप्रतीक्षित पुस्तकों ‘बाल प्रज्ञा प्रबोधिनी’ और ‘प्रगति पथ’ का भव्य विमोचन किया गया। यह कार्यक्रम शहर के प्रसिद्ध होटल सिद्धार्थ में आयोजित हुआ, जहां साहित्यिक जगत से जुड़े कई प्रमुख चेहरे मौजूद रहे।


प्रज्ञा तिवारी पुस्तक विमोचन कार्यक्रम प्रतापगढ़ होटल सिद्धार्थ
कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना के साथ हुई, जिसे मीरा तिवारी ने अपनी मधुर वाणी में प्रस्तुत किया। इसके बाद मंच पर मौजूद अतिथियों और साहित्यकारों ने पुस्तक का औपचारिक विमोचन किया। इस मौके पर बोलते हुए प्रज्ञा तिवारी ने अपनी रचनात्मक यात्रा को साझा करते हुए बताया कि उन्होंने अब तक सैकड़ों कविताएं लिखी हैं और आने वाले समय में उनकी और भी पुस्तकों का प्रकाशन होगा।
उन्होंने विशेष रूप से वरिष्ठ पत्रकार अखिल नारायण सिंह का आभार व्यक्त किया, जिनके सहयोग के बिना यह प्रकाशन संभव नहीं हो पाता। कार्यक्रम के दौरान ‘न्यूज़ स्टैंडर्ड’ समाचार पत्र की ओर से प्रज्ञा तिवारी को सम्मानित भी किया गया, जो उनके साहित्यिक योगदान का प्रमाण है।
इस अवसर पर उपस्थित कवयित्रियों ने अपने-अपने अंदाज में काव्य पाठ कर कार्यक्रम को जीवंत बना दिया। प्रमुख रूप से मीरा तिवारी, पूनम मिश्रा, महाश्वेता राजे सिंह, चांदनी दुबे, डॉ. रंजीता समृद्धि और नाजो नाज ने अपनी रचनाओं के माध्यम से लेखिका को शुभकामनाएं दीं और साहित्यिक माहौल को ऊंचाई पर पहुंचाया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. शाहिदा खान (प्रबंधिका, न्यू एंजिल्स कॉलेज) ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभा पांडे उपस्थित रहीं। अतिथियों का स्वागत चांदनी दुबे द्वारा बैज लगाकर किया गया।
आयोजन में वरिष्ठ पत्रकार सुमन और आयोजक अखिल नारायण सिंह ने सभी अतिथियों को शॉल और पुष्प गुच्छ भेंट कर सम्मानित किया। इस दौरान डॉ. हरिकेश बहादुर सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि ‘न्यूज़ स्टैंडर्ड’ जैसे मंच नए लेखकों को प्रोत्साहन देने में अहम भूमिका निभा रहे हैं, जिसकी नींव स्वर्गीय सत्यनारायण सिंह ने रखी थी और अब इसे आगे बढ़ाने का कार्य अखिल नारायण सिंह कर रहे हैं।
डॉ. संगम लाल त्रिपाठी ‘भंवर’ ने आयोजन समिति का आभार जताते हुए प्रज्ञा तिवारी को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। वहीं, नियाज प्रतापगढ़ी ने कहा कि प्रज्ञा तिवारी की लेखनी में समाज, रिश्तों और संवेदनाओं के प्रति जो गहराई दिखाई देती है, वह उन्हें एक सच्ची साहित्यकार के रूप में स्थापित करती है। उन्होंने भविष्य में और भी भव्य कार्यक्रम आयोजित करने का भरोसा जताया।
कार्यक्रम का सफल संचालन वरिष्ठ साहित्यकार प्रेम कुमार त्रिपाठी ने किया। अंत में अनिल प्रताप त्रिपाठी ‘प्रवात’ ने सभी अतिथियों को धन्यवाद देते हुए कार्यक्रम के समापन की घोषणा की।
इस भव्य आयोजन में समाजसेवी और गणमान्य व्यक्तियों की भी उल्लेखनीय उपस्थिति रही, जिनमें श्याम शंकर द्विवेदी, संजय द्विवेदी, डॉ. शमीम खान, रामकेवल पुष्पाकर, रिजवान अहमद, मोहम्मद अनीस और होटल सिद्धार्थ के मैनेजर संतोष सिंह शामिल रहे।
यह साहित्यिक आयोजन न सिर्फ एक पुस्तक विमोचन तक सीमित रहा, बल्कि यह नए और उभरते लेखकों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बना। प्रज्ञा तिवारी की यह उपलब्धि आने वाले समय में हिंदी साहित्य को नई दिशा देने का संकेत देती है।

Chautha Prahari
Author: Chautha Prahari

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