लखनऊ, 21 अप्रैल। नई दिल्ली में आयोजित प्रतिष्ठित ग्रीन ट्रांसपोर्ट कॉन्क्लेव में उत्तर प्रदेश ने हरित, आधुनिक और तकनीक-आधारित परिवहन मॉडल की प्रभावशाली प्रस्तुति देकर राष्ट्रीय मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। इस कॉन्क्लेव में प्रदेश के सतत मोबिलिटी विजन, उन्नत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और भविष्य उन्मुख अवसंरचना विकास को व्यापक सराहना मिली।
इंडियन फेडरेशन ऑफ ग्रीन एनर्जी द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘ग्रीन ट्रांसपोर्ट कॉन्क्लेव: एक्सेलेरेटिंग टुवर्ड्स द फ्यूचर ऑफ सस्टेनेबल एंड ग्रीन मोबिलिटी’ का मंगलवार को भव्य शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री Nitin Gadkari ने किया। इस दौरान देशभर से नीति-निर्माता, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, परिवहन विशेषज्ञ, निवेशक और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

इस राष्ट्रीय मंच पर उत्तर प्रदेश स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन (एसटीसी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी Manoj Kumar Singh ने राज्य के हरित परिवहन मॉडल की व्यापक रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि उत्तर प्रदेश देश में ग्रीन मोबिलिटी के क्षेत्र में नए मानक स्थापित कर रहा है और सतत विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
कॉन्क्लेव के दौरान ऑटोमोबाइल, रेलवे, मरीन, एविएशन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, जैव ईंधन, लंबी दूरी माल परिवहन, शहरी परिवहन, स्मार्ट मोबिलिटी और ऊर्जा संक्रमण जैसे विविध विषयों पर विशेषज्ञ सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में उत्तर प्रदेश के विकास मॉडल और निवेश संभावनाओं पर विशेष चर्चा हुई, जिसे प्रतिभागियों ने सकारात्मक रूप से सराहा।
अपने प्रस्तुतीकरण में मनोज कुमार सिंह ने स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार सतत परिवहन प्रणाली विकसित करने के लिए स्वच्छ ऊर्जा, मजबूत कनेक्टिविटी और तकनीकी नवाचार पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के नेतृत्व में राज्य आर्थिक प्रगति का प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है, और इसके लिए आधुनिक, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन व्यवस्था अनिवार्य है।
उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेस-वे नेटवर्क के तेजी से विस्तार को भी इस मॉडल की प्रमुख उपलब्धि बताया गया। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे, गंगा एक्सप्रेस-वे और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे जैसे प्रोजेक्ट्स ने राज्य में कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई दी है। इन परियोजनाओं के चलते यात्रा समय में कमी आई है, ईंधन की बचत हुई है और औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिला है।
इसके साथ ही राज्य सरकार मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी को मजबूत कर रही है, जिसमें सड़क, रेल और जल परिवहन का समन्वय शामिल है। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के क्षेत्र में ई-बसों का संचालन, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार और स्वच्छ सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दी जा रही है।
ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों को बढ़ावा देने के लिए एथेनॉल, बायोगैस और संपीड़ित बायोगैस (CBG) के उपयोग पर भी जोर दिया जा रहा है। कृषि अपशिष्ट आधारित ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देकर राज्य पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय वृद्धि दोनों लक्ष्यों को साध रहा है।
तकनीकी नवाचारों की बात करें तो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम, डिजिटल टोलिंग और रीयल-टाइम मॉनिटरिंग जैसी आधुनिक तकनीकों को तेजी से अपनाया जा रहा है। इससे न केवल यातायात प्रबंधन बेहतर होगा, बल्कि नागरिकों को अधिक सुरक्षित और कुशल परिवहन सेवाएं भी मिलेंगी।
मनोज कुमार सिंह ने अपने संबोधन में यह भी स्पष्ट किया कि हरित परिवहन, कुशल लॉजिस्टिक्स और सतत अवसंरचना ‘विकसित उत्तर प्रदेश-2047’ के विजन और ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
राष्ट्रीय स्तर पर मिली इस सराहना से यह स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश अब केवल जनसंख्या के आधार पर नहीं, बल्कि विकास और नवाचार के आधार पर भी देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।
Author: Chautha Prahari
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