लखनऊ,23 अप्रैल।उत्तर प्रदेश में खेती को आधुनिक और ज्यादा मुनाफे वाली बनाने के लिए बड़ा रोडमैप तैयार किया गया है। लखनऊ में हुई प्रेस वार्ता में कृषि वैज्ञानिक डॉ संजय सिंह ने बताया कि आने वाले वर्षों में नई तकनीकों के जरिए किसानों की आय बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
यह योजना “विकसित कृषि विकसित भारत @2047” विजन के तहत तैयार की गई है, जिसमें खेती को पारंपरिक मॉडल से निकालकर टेक्नोलॉजी आधारित बनाया जाएगा। हाल ही में आयोजित कृषि विज्ञान सम्मेलन में इस दिशा में कई अहम सुझाव सामने आए, जिन पर तेजी से काम शुरू करने की तैयारी है।

तकनीक से खेती में बदलाव-आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा। इससे किसानों को फसल की स्थिति, बीमारी और मौसम के प्रभाव की सटीक जानकारी मिल सकेगी। ड्रोन के जरिए दवा और खाद का छिड़काव भी आसान होगा, जिससे लागत घटेगी।
नई किस्मों पर फोकस-प्रदेश में चावल, मक्का और बागवानी फसलों की बेहतर किस्मों के विकास पर काम तेज किया जा रहा है। खासतौर पर पारंपरिक किस्मों को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर किसानों को ज्यादा फायदा देने की रणनीति बनाई जा रही है।
खेती में मशीनीकरण-धान की सीधी बुवाई और गन्ने के साथ अन्य फसलों की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए मशीनों के उपयोग को बढ़ाने पर जोर है, ताकि समय और लागत दोनों की बचत हो सके।
सीधे बाजार से जुड़ेंगे किसान-सरकार किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम दिलाने के लिए उन्हें बड़े बाजारों से सीधे जोड़ने की योजना पर काम कर रही है। इससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी और किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।
प्रशिक्षण और रिसर्च पर जोर-कृषि क्षेत्र से जुड़े वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षण देने की तैयारी है। साथ ही प्रदेश में नए रिसर्च और इनोवेशन सेंटर खोलने की दिशा में भी काम चल रहा है, जिससे खेती में नई तकनीकों को तेजी से लागू किया जा सके।
पशुपालन और जैविक खेती-पशुपालन में भी तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा, जिससे दूध उत्पादन और पशुओं की देखभाल बेहतर हो सके। इसके अलावा जैविक खेती को बढ़ावा देने और उसकी प्रक्रिया को आसान बनाने पर भी काम हो रहा है।
किसानों की आर्थिक स्थिति पर नजर-किसानों की वास्तविक आय और खर्च को समझने के लिए व्यापक सर्वे कराया जाएगा। इसके आधार पर नई योजनाएं बनाई जाएंगी, जिससे सीधे किसानों को फायदा मिले।
Author: Chautha Prahari
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