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लखनऊ में ‘रश्मिरथी पर्व’ की शुरुआत, सीएम योगी बोले—जातिवाद से देश को नुकसान

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रश्मिरथी पर्व लखनऊ: सीएम योगी का बयान, जातिवाद और युवा पर बड़ा संदेश

लखनऊ, 24 अप्रैल। राजधानी लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में शुक्रवार से तीन दिवसीय ‘रश्मिरथी पर्व’ की शुरुआत हुई। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया और ‘रश्मिरथी से संवाद’ स्मारिका का विमोचन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि जातिवाद के नाम पर समाज को बांटने और देश को कमजोर करने वालों से सावधान रहना होगा।
सीएम ने कहा कि राष्ट्रकवि Ramdhari Singh Dinkar की कृति ‘रश्मिरथी’ आज भी उतनी ही प्रासंगिक है, जितनी पहले थी। यह सिर्फ साहित्य नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और दिशा देने वाली ताकत है। बहरहाल सीएम योगी का रश्मिरथी पर्व के शुभारंभ पर संबोधन लोगों को खूब भाया।

लखनऊ में रश्मिरथी पर्व के उद्घाटन पर संबोधित करते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
तीन दिवसीय ‘रश्मिरथी पर्व’ के शुभारंभ एवं ‘रश्मिरथी से संवाद’ स्मारिका के विमोचन कार्यक्रम को सीएम ने किया संबोधित


क्या है ‘रश्मिरथी’ और क्यों खास है?
‘रश्मिरथी’ महाभारत के कर्ण पर आधारित एक प्रसिद्ध काव्य है। इसमें सम्मान, संघर्ष और पहचान की बात कही गई है। यही वजह है कि आज भी यह युवाओं के बीच लोकप्रिय है।
सीएम योगी ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में साफ कहा कि भारत को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने के लिए समाज में एकता जरूरी है। उन्होंने दिनकर की पंक्तियों का जिक्र करते हुए बताया कि असली सम्मान कर्म और साहस से मिलता है, न कि जाति से।
उन्होंने यह भी कहा कि वे कई बार दिनकर की रचनाओं का उपयोग अपने भाषणों में करते हैं, क्योंकि उनमें समाज को जागरूक करने की ताकत है।
कार्यक्रम में क्या खास रहा?
कार्यक्रम के दौरान ‘रश्मिरथी’ पर आधारित नाट्य मंचन किया गया, जिसे देखकर मुख्यमंत्री ने कलाकारों की सराहना की। उन्होंने संस्कृति विभाग को निर्देश दिया कि ऐसे आयोजन ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाए जाएं।
आने वाले दिनों में Swami Vivekananda, Bal Gangadhar Tilak और Atal Bihari Vajpayee पर आधारित नाट्य प्रस्तुतियां भी होंगी।
लखनऊ क्यों खास?
लखनऊ लंबे समय से सांस्कृतिक और राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र रहा है। ऐसे कार्यक्रम शहर की पहचान को और मजबूत करते हैं। यहां पहले भी बड़े साहित्यिक और ऐतिहासिक आयोजन होते रहे हैं, जो युवाओं को जोड़ते हैं।
भविष्य पर असर
इस तरह के आयोजन सिर्फ कार्यक्रम नहीं होते, बल्कि समाज में सोच बदलने का काम करते हैं।
युवाओं को अपनी संस्कृति और साहित्य से जुड़ने का मौका मिलता है।
समाज में एकता और जागरूकता बढ़ती है
और सबसे जरूरी, नई पीढ़ी को सही दिशा मिलती है
अगर सरकार और संस्थाएं ऐसे कार्यक्रम लगातार करती रहीं, तो इसका असर आने वाले समय में साफ दिखेगा—खासकर युवाओं की सोच और समाज के माहौल में।

VINAY PRAKASH SINGH
Author: VINAY PRAKASH SINGH

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