लखनऊ, 14 मई(चौथा प्रहरी)। उत्तर प्रदेश सरकार ने दावा किया है कि पिछले 9 वर्षों में गन्ना किसानों को 3.21 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है। सरकार के मुताबिक यह देश में अब तक का सबसे बड़ा गन्ना मूल्य भुगतान है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के नेतृत्व में किसानों को समय पर भुगतान, डिजिटल व्यवस्था और गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी जैसी योजनाओं का असर प्रदेश के लाखों किसानों पर पड़ा है।

सरकार ने पेराई सत्र 2025-26 के लिए गन्ने के दाम में 30 रुपये प्रति कुंतल की बढ़ोतरी भी की है। अगेती प्रजाति का मूल्य 400 रुपये और सामान्य प्रजाति का मूल्य 390 रुपये प्रति कुंतल तय किया गया है। इससे किसानों को करीब 3 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ मिलने का अनुमान है।
प्रदेश सरकार के अनुसार 2017 से अब तक 3,21,963 करोड़ रुपये सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजे गए हैं। इससे बिचौलियों की भूमिका कम हुई है और भुगतान प्रक्रिया तेज हुई है। इससे पहले 2007 से 2012 के बीच 52,131 करोड़ रुपये और 2012 से 2017 के बीच 95,215 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ था।
सरकार ने ‘स्मार्ट गन्ना किसान’ प्रणाली और ई-गन्ना ऐप को भी बड़ी उपलब्धि बताया है। अब गन्ना पर्ची, सर्वे, कैलेंडर और भुगतान से जुड़ी जानकारी किसानों को मोबाइल पर मिल रही है। प्रदेश के करीब 48 लाख गन्ना किसान परिवार इस डिजिटल व्यवस्था से जुड़े हैं।
गन्ना विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025-26 में प्रदेश में 29.51 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती की गई। उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य बना हुआ है। राज्य में इस समय 121 चीनी मिलें संचालित हैं। इनमें सरकारी, सहकारी और निजी क्षेत्र की मिलें शामिल हैं। इन मिलों ने 877.93 लाख टन गन्ने की पेराई कर 89.68 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है।
सरकार ने यह भी दावा किया कि उत्तर प्रदेश की औसत चीनी परता 10.21 प्रतिशत रही, जो महाराष्ट्र से अधिक है। वहीं एथेनॉल उत्पादन भी बढ़कर 188 करोड़ लीटर तक पहुंच गया है।
प्रदेश में बंद चीनी मिलों के पुनरुद्धार, नई मिलों की स्थापना और पेराई क्षमता बढ़ाने से रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। सरकार के मुताबिक पिछले 9 वर्षों में 1,28,500 टीसीडी अतिरिक्त पेराई क्षमता विकसित हुई और करीब 6,924 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। इससे 10 लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा हुए हैं।
गन्ना किसानों की शिकायतों के समाधान के लिए सरकार ने टोल फ्री नंबर 1800-121-3203 भी जारी किया है। यह कॉल सेंटर 24 घंटे काम कर रहा है। गन्ना आयुक्त मिनिस्ती एस. के अनुसार ऑनलाइन शिकायत और डिजिटल सेवाओं से किसानों को राहत मिली है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि समय पर भुगतान और तकनीक आधारित व्यवस्था से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है। आने वाले समय में गन्ना उत्पादन, एथेनॉल और चीनी उद्योग में बढ़ोतरी से प्रदेश की अर्थव्यवस्था और रोजगार पर भी असर दिख सकता है।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
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