लखनऊ, 14(चौथा प्रहरी)। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की दिव्यांग भरण-पोषण अनुदान योजना लाखों दिव्यांगजनों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आई है। प्रदेश में इस योजना के तहत 12 लाख से अधिक लोगों को हर महीने 1000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। सरकार का कहना है कि योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और निराश्रित दिव्यांगजनों को सम्मानजनक जीवन देना है।

सरकार के मुताबिक वर्ष 2025-26 में अब तक 12,23,295 लाभार्थियों को योजना का लाभ मिल चुका है। सहायता राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जा रही है। इससे लोगों को समय पर पैसा मिल रहा है और बिचौलियों की भूमिका भी खत्म हुई है।
पहले यह योजना समाज कल्याण विभाग के अधीन संचालित होती थी, लेकिन बाद में दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग बनने के बाद इसकी जिम्मेदारी इसी विभाग को सौंप दी गई। योजना के तहत 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाले पात्र लोगों को आर्थिक सहायता दी जाती है।
योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक की उम्र 18 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए। साथ ही उसके पास आजीविका का कोई स्थायी साधन नहीं होना चाहिए। सरकार ने आय सीमा भी तय की है। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए वार्षिक आय सीमा 46,080 रुपये और शहरी क्षेत्रों के लिए 56,460 रुपये रखी गई है।
सरकार ने आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया है। अब पात्र दिव्यांगजन घर बैठे sspy-up.gov.in पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं। इससे दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को भी काफी सुविधा मिली है। ऑनलाइन व्यवस्था से आवेदन प्रक्रिया पहले के मुकाबले आसान और तेज हुई है।
भुगतान व्यवस्था को भी डिजिटल बनाया गया है। पीएफएमएस और कोषागार की ई-पेमेंट प्रणाली के जरिए पैसा सीधे बैंक खातों में भेजा जा रहा है। इससे पारदर्शिता बढ़ी है और भ्रष्टाचार की शिकायतों में कमी आई है।
दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के उप निदेशक डॉ. अमित कुमार राय ने कहा कि सरकार दिव्यांगजनों के कल्याण और सशक्तीकरण के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने बताया कि योजना आर्थिक रूप से कमजोर दिव्यांगजनों के लिए बड़ा सहारा साबित हो रही है और कोशिश है कि सभी पात्र लोगों तक इसका लाभ पहुंचे।
सरकार की इस पहल का असर आने वाले समय में और बढ़ सकता है। ऑनलाइन प्रक्रिया और सीधे बैंक खाते में भुगतान जैसी व्यवस्था से ज्यादा लोग योजना से जुड़ सकेंगे। इससे दिव्यांगजनों को आर्थिक मदद के साथ सामाजिक सुरक्षा भी मिलेगी।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
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