लखनऊ,29 मई (चौथा प्रहरी)। राजधानी लखनऊ में जून का पहला सप्ताह भक्ति और आध्यात्मिक माहौल से भरने जा रहा है। पूज्यपाद पद्मविभूषण जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी महाराज की नौ दिवसीय श्रीराम कथा का आयोजन 1 जून से 9 जून तक सीतापुर रोड स्थित बृज की रसोई परिसर में किया जाएगा। कथा प्रतिदिन शाम 5 बजे से रात 8 बजे तक होगी। आयोजन समिति के संरक्षक और लखनऊ उत्तर के विधायक डॉ. नीरज बोरा ने प्रेस वार्ता में इसकी जानकारी दी।

डॉ. बोरा ने बताया कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी देश के प्रसिद्ध संत, विद्वान और शिक्षाविद हैं। उन्होंने बताया कि मात्र दो माह की उम्र में दृष्टि चली जाने के बावजूद उन्होंने अपनी प्रतिभा और साधना के बल पर 250 से अधिक ग्रंथों की रचना की। चित्रकूट में दिव्यांगजनों के लिए विश्वविद्यालय की स्थापना भी उनके प्रमुख कार्यों में शामिल है। अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि मामले में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। देश और संस्कृति के क्षेत्र में योगदान के लिए भारत सरकार उन्हें पद्मविभूषण सम्मान से सम्मानित कर चुकी है।
आयोजन समिति के अनुसार कथा के पहले दिन कलश यात्रा, गुरु वंदना और रामचरितमानस के प्रसंगों का वर्णन होगा। इसके बाद नौ दिनों तक शिव विवाह, श्रीराम जन्म, बाललीला, सीताराम विवाह, राम वनवास, केवट संवाद, राम-भरत मिलन, सीता हरण और शबरी चरित्र जैसे प्रसंग सुनाए जाएंगे।
कथा का समापन 9 जून को विशेष कार्यक्रम के साथ होगा। अंतिम दिन सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक लंकादहन, अयोध्या आगमन और श्रीराम राज्याभिषेक उत्सव का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद विशाल भंडारा और महाप्रसाद वितरण होगा।
डॉ. नीरज बोरा ने बताया कि आयोजन को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। नगर निगम, जलकल, बिजली विभाग और अन्य संबंधित विभागों के साथ बैठक कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई है। श्रद्धालुओं के बैठने, वाहन पार्किंग, पेयजल और प्रकाश व्यवस्था के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।
उन्होंने लखनऊ और आसपास के जिलों के लोगों से बड़ी संख्या में पहुंचकर श्रीराम कथा का श्रवण करने और आध्यात्मिक लाभ लेने की अपील की।
प्रेस वार्ता में आयोजन समिति ‘उत्सव’ के महामंत्री राकेश पाण्डेय, जानकीपुरम दुर्गा पूजा उत्सव के संयोजक सौरभ वन्द्योपाध्याय, श्रीश्याम परिवार के अध्यक्ष संजीव अग्रवाल, महामंत्री रुपेश अग्रवाल समेत कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
भविष्य पर प्रभाव
आयोजकों का मानना है कि इस तरह के धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन समाज में आध्यात्मिक माहौल मजबूत करते हैं। साथ ही युवा पीढ़ी को रामचरितमानस और भारतीय संस्कृति से जोड़ने में भी ऐसे कार्यक्रम अहम भूमिका निभाते हैं।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
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