लखनऊ,10जून( चौथा प्रहरी)। उत्तर प्रदेश में बच्चों और गर्भवती महिलाओं को दिए जाने वाले पोषाहार की आपूर्ति को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग ने राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नेफेड) से जवाब-तलब किया है। मामला उन कंपनियों को दिए गए पोषाहार आपूर्ति टेंडर से जुड़ा है, जिन पर पहले से विभिन्न तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं।

जानकारी के अनुसार प्रदेश के हजारों आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषाहार आपूर्ति के लिए करीब 27 हजार करोड़ रुपये के टेंडर आवंटन को लेकर सवाल उठे हैं। आरोप है कि जिन कंपनियों को टेंडर दिया गया, उनमें कुछ के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने, ब्लैकलिस्ट होने या उत्पादन क्षमता को लेकर गंभीर आपत्तियां सामने आ चुकी हैं।
विवाद में जिन कंपनियों के नाम सामने आए हैं, उनमें जेवीएस फूड्स, मेसर्स हार्दिक एग्रोट्रेड, एमवी एग्रोटेक, नोखा एग्रोटेक और सीआर ग्लोबल पल्सेस शामिल हैं। आरोप है कि इनमें से कुछ कंपनियों की उत्पादन इकाइयों में वास्तविक उत्पादन नहीं हो रहा है। यह भी कहा जा रहा है कि पोषाहार तैयार करने के बजाय बाहर से सामग्री खरीदकर केवल पैकेजिंग का काम किया जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि टेंडर मिलने के करीब दो महीने बाद भी कई स्थानों पर आंगनबाड़ी केंद्रों तक पोषाहार की आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। इसका सीधा असर उन बच्चों और गर्भवती महिलाओं पर पड़ सकता है, जो सरकारी पोषण योजनाओं पर निर्भर हैं।
मामले ने तब और तूल पकड़ा जब सत्तारूढ़ दल के कुछ विधान परिषद सदस्यों (एमएलसी) ने भी टेंडर प्रक्रिया में कथित कार्टेलाइजेशन और अनियमितताओं के आरोप उठाए। इसके बाद विभागीय स्तर पर हलचल तेज हुई और निर्देशक बाल विकास एवं पुष्टाहार हर्षिता माथुर द्वारा नेफेड से पूरे मामले में स्पष्टीकरण मांगा गया।
हालांकि फिलहाल विभाग की ओर से जवाब-तलब की कार्रवाई शुरू हुई है, लेकिन अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या संबंधित कंपनियों की उत्पादन इकाइयों की स्वतंत्र जांच भी कराई जाएगी। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो टेंडर प्रक्रिया और आपूर्ति व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।
आने वाले दिनों में विभाग की जांच और नेफेड के जवाब से यह साफ होगा कि पोषाहार आपूर्ति में हुई देरी और कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदारी किसकी है। साथ ही यह भी तय होगा कि प्रदेश के लाखों बच्चों और गर्भवती महिलाओं तक पोषण योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचाने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
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