Breaking News
टीबी मुक्त अभियान में तेजी लाने के निर्देश, हाई रिस्क गांवों में तुरंत लगेंगे आयुष्मान आरोग्य शिविर आजमगढ़ में सीएम योगी का बड़ा संदेश: अखिलेश की बेटी पर टिप्पणी करने वालों पर कार्रवाई, कहा- बेटियों का अपमान बर्दाश्त नहीं बीएचयू में बुजुर्गों के लिए बन रहा अत्याधुनिक सेंटर, सीएम योगी ने किया निरीक्षण लखनऊ के 14 शहरी स्वास्थ्य केंद्र बने पॉलीक्लिनिक, अब घर के पास मिलेंगी विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं यूपी न्यूज: टीईटी से पहले नियुक्त शिक्षकों के समर्थन में उतरे शिक्षक संगठन, 18 जून को देशभर में प्रदर्शन का ऐलान यूपी न्यूज: योगी सरकार की छात्रवृत्ति योजना से 8.88 लाख छात्रों को मदद, प्रयागराज सबसे आगे
15 Best News Portal Development Company In India

पोषाहार टेंडर पर उठे सवाल: नेफेड से जवाब-तलब, आंगनबाड़ी केंद्रों तक नहीं पहुंचा राशन

SHARE:

लखनऊ,10जून( चौथा प्रहरी)। उत्तर प्रदेश में बच्चों और गर्भवती महिलाओं को दिए जाने वाले पोषाहार की आपूर्ति को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग ने राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नेफेड) से जवाब-तलब किया है। मामला उन कंपनियों को दिए गए पोषाहार आपूर्ति टेंडर से जुड़ा है, जिन पर पहले से विभिन्न तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं।

बाल विकास पुस्तक निदेशक हर्षिता माथुर द्वारा नेफेड से मांगे गए स्पष्टीकरण का पत्र
जानकारी के अनुसार प्रदेश के हजारों आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषाहार आपूर्ति के लिए करीब 27 हजार करोड़ रुपये के टेंडर आवंटन को लेकर सवाल उठे हैं। आरोप है कि जिन कंपनियों को टेंडर दिया गया, उनमें कुछ के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने, ब्लैकलिस्ट होने या उत्पादन क्षमता को लेकर गंभीर आपत्तियां सामने आ चुकी हैं।
विवाद में जिन कंपनियों के नाम सामने आए हैं, उनमें जेवीएस फूड्स, मेसर्स हार्दिक एग्रोट्रेड, एमवी एग्रोटेक, नोखा एग्रोटेक और सीआर ग्लोबल पल्सेस शामिल हैं। आरोप है कि इनमें से कुछ कंपनियों की उत्पादन इकाइयों में वास्तविक उत्पादन नहीं हो रहा है। यह भी कहा जा रहा है कि पोषाहार तैयार करने के बजाय बाहर से सामग्री खरीदकर केवल पैकेजिंग का काम किया जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि टेंडर मिलने के करीब दो महीने बाद भी कई स्थानों पर आंगनबाड़ी केंद्रों तक पोषाहार की आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। इसका सीधा असर उन बच्चों और गर्भवती महिलाओं पर पड़ सकता है, जो सरकारी पोषण योजनाओं पर निर्भर हैं।
मामले ने तब और तूल पकड़ा जब सत्तारूढ़ दल के कुछ विधान परिषद सदस्यों (एमएलसी) ने भी टेंडर प्रक्रिया में कथित कार्टेलाइजेशन और अनियमितताओं के आरोप उठाए। इसके बाद विभागीय स्तर पर हलचल तेज हुई और निर्देशक बाल विकास एवं पुष्टाहार हर्षिता माथुर द्वारा नेफेड से पूरे मामले में स्पष्टीकरण मांगा गया।
हालांकि फिलहाल विभाग की ओर से जवाब-तलब की कार्रवाई शुरू हुई है, लेकिन अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या संबंधित कंपनियों की उत्पादन इकाइयों की स्वतंत्र जांच भी कराई जाएगी। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो टेंडर प्रक्रिया और आपूर्ति व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।
आने वाले दिनों में विभाग की जांच और नेफेड के जवाब से यह साफ होगा कि पोषाहार आपूर्ति में हुई देरी और कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदारी किसकी है। साथ ही यह भी तय होगा कि प्रदेश के लाखों बच्चों और गर्भवती महिलाओं तक पोषण योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचाने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।

VINAY PRAKASH SINGH
Author: VINAY PRAKASH SINGH

Registration NO. UDYAM -UP-24-0043854

best news portal development company in india
सबसे ज्यादा पड़ गई