लखनऊ,11जून(चौथा प्रहरी)। राजधानी लखनऊ में ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। एक आवेदक ने 6 मार्च 2026 को ड्राइविंग टेस्ट दिया और उसमें सफल भी घोषित किया गया, लेकिन तीन महीने बीत जाने के बाद भी उसका लाइसेंस जारी नहीं हो सका। बताया जा रहा है कि टेस्ट पास होने के बावजूद लाइसेंस का अंतिम अनुमोदन नहीं किया गया, जिसके कारण पूरा मामला लंबित रह गया।
जानकारी के अनुसार, आवेदक ने ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी की थीं। निर्धारित तिथि पर उसने ड्राइविंग टेस्ट दिया और उसे सफल घोषित कर दिया गया। सामान्य तौर पर टेस्ट पास होने के बाद लाइसेंस जारी होने की प्रक्रिया आगे बढ़ जाती है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ।

आवेदक ने जब अपने आवेदन की स्थिति की जांच कराई तो पता चला कि संबंधित मोटर यान निरीक्षक ने उसे टेस्ट में पास तो कर दिया, लेकिन अंतिम अप्रूवल नहीं किया। इसी वजह से लाइसेंस जारी होने की प्रक्रिया अधूरी रह गई। 6 जून 2026 तक भी आवेदक को उसका ड्राइविंग लाइसेंस नहीं मिल सका।
इस मामले के सामने आने के बाद ट्रांसपोर्ट नगर स्थित आरटीओ कार्यालय की कार्यप्रणाली पर चर्चा शुरू हो गई है। लोगों का कहना है कि यदि कोई आवेदक सभी नियमों का पालन कर चुका है और ड्राइविंग टेस्ट में सफल भी हो गया है, तो उसका आवेदन महीनों तक लंबित नहीं रहना चाहिए।

मामले में संबंधित मोटर यान निरीक्षक से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई। वहीं, आवेदक का कहना है कि विभागीय स्तर पर हुई देरी का नुकसान उसे उठाना पड़ रहा है। लाइसेंस न मिलने के कारण उसे कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे यह सवाल उठ रहा है कि टेस्ट पास होने के बाद भी किसी आवेदन को लंबे समय तक लंबित रखने की गुंजाइश कैसे बनी रहती है। जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से अब तक इस संबंध में कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
वहीं, अपर परिवहन आयुक्त (आईटी) विजय कुमार सिंह की ओर से भी इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है। ऐसे में आवेदकों के सामने यह सवाल बना हुआ है कि यदि उनका लाइसेंस बिना किसी स्पष्ट कारण के लंबित रहता है तो समाधान के लिए वे किससे संपर्क करें।
परिवहन विभाग के जानकारों का मानना है कि लंबित ड्राइविंग लाइसेंस आवेदनों की नियमित समीक्षा और समयबद्ध निस्तारण जरूरी है। यदि ऐसे मामलों की जांच नहीं हुई तो परिवहन विभाग की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल और बढ़ सकते हैं। साथ ही आम लोगों का भरोसा भी प्रभावित हो सकता है। विभाग के लिए यह जरूरी होगा कि लंबित आवेदनों की स्थिति की समीक्षा कर समय पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि आवेदकों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
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