लखनऊ,09जुलाई(चौथा प्रहरी)। देशभर के रेलवे कुली आगामी 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र के दौरान दिल्ली पहुंचकर केंद्र सरकार और सांसदों के सामने अपनी मांगें रखेंगे। राष्ट्रीय कुली मोर्चा की ऑनलाइन बैठक में यह फैसला लिया गया। संगठन का कहना है कि कुलियों की नौकरी, सामाजिक सुरक्षा और रेलवे स्टेशनों पर उनके काम से जुड़े कई मुद्दों पर लंबे समय से ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। कुलियों की समस्याओ को लेकर संगठन लामबंद हो चुकी है और अपनी मांगो को लेकर लगातार शांति प्रदर्शन कर रहा है। इसी कडी में 20 जुलाई के मानसून सत्र पर राष्ट्रीय कुली मोर्चा सरकार व सांसदो से संवाद करने का ठन लिए है बहरहाल संगठन को कितनी सफलता मिलेगी यह तो आने वाला समय बतायेगा।

बैठक में तय किया गया कि प्रतिनिधिमंडल सांसदों और रेलवे मंत्रालय को मांग पत्र सौंपेगा। इसमें कुलियों को रेलवे सेवा में समायोजित करने, सामाजिक सुरक्षा से जुड़े पुराने आदेशों का पालन कराने और कुलियों की स्थिति पर हुई जांच रिपोर्ट को संसद में पेश करने की मांग शामिल रहेगी।
संगठन का कहना है कि रेलवे स्टेशनों पर सामान ढोने से जुड़े कई काम अब दूसरी व्यवस्थाओं के जरिए कराए जा रहे हैं। कुलियों का दावा है कि बैटरी कार, ट्रॉली व्यवस्था और डिजिटल सेवाओं से जुड़े कार्य उनकी सहकारी समितियों को दिए जाने चाहिए, ताकि उनकी आजीविका सुरक्षित रह सके।
बैठक में रेलवे में बढ़ती निजी भागीदारी को लेकर भी चिंता जताई गई। प्रतिनिधियों का कहना था कि नई व्यवस्थाओं के कारण पारंपरिक कुलियों के रोजगार पर असर पड़ रहा है। उनका आरोप है कि रेलवे स्टेशनों पर कई जगह ऐसे काम भी कराए जा रहे हैं, जिनसे कुलियों की आय लगातार घट रही है।
राष्ट्रीय कुली मोर्चा ने यह भी कहा कि पिछले वर्ष कुलियों की स्थिति और सरकारी आदेशों के पालन को लेकर कराई गई जांच की रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है। संगठन चाहता है कि यह रिपोर्ट संसद के सामने रखी जाए और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई हो।
बैठक में संगठन के राष्ट्रीय समन्वयक राम सुरेश यादव के खिलाफ कथित फर्जी शिकायत के आधार पर हुई कार्रवाई पर भी नाराजगी जताई गई। इस मामले में भी रेलवे मंत्रालय को अलग से ज्ञापन देने का निर्णय लिया गया।
क्या असर पड़ सकता है?
यदि संसद के मानसून सत्र में यह मुद्दा उठता है तो रेलवे कुलियों के रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और स्टेशन पर काम के अधिकार को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो सकती है। सरकार की ओर से जवाब या नई नीति आने पर हजारों लाइसेंसधारी कुलियों के भविष्य पर असर पड़ सकता है।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
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