Breaking News
दरोगा खेड़ा डाइवर्जन कट बंद, लोगों का विरोध—हाईवे पार करना हुआ मुश्किल यूपी बोर्ड परिणाम : न्यू पब्लिक इंटर कॉलेज का सराहनीय प्रदर्शन, आव्या 90% व आराध्या 86% के साथ अव्वल 2047 विजन पर यूपी सरकार का बड़ा प्लान: एआई और ड्रोन से खेती बदलेगी, किसानों की आय बढ़ाने की तैयारी मिर्जापुर सड़क हादसा: तेज रफ्तार ट्रक की टक्कर से बोलेरो में लगी आग, 11 लोगों की जिंदा जलकर मौत गोरखपुर को ₹1055 करोड़ की 497 परियोजनाओं की सौगात, ईको पार्क और फोरलेन रोड का लोकार्पण,CM योगी बोले,नीयत साफ हो तो बदलती है नियति जमीनी विवादों पर सख्त हुए सीएम योगी: विशेष टीम बनाकर त्वरित निस्तारण के निर्देश, जनता दर्शन में सुनीं 200 फरियादें
15 Best News Portal Development Company In India

जालौन में ‘चमारी’ और उन्नाव में ‘चमरौली’ गांव पर उठे सवाल, डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने नाम बदलने की उठाई मांग

SHARE:

MLC dr Lal ji Prasad Nirmal

📰 विशेष खबर
आजादी के 79 साल बाद भी जालौन में ‘चमारी’ और उन्नाव में ‘चमरौली’ गांव : डॉ. निर्मल
मुख्यमंत्री योगी से मिलकर गांवों का नाम बदलने का करेंगे आग्रह
लखनऊ। उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के पूर्व अध्यक्ष और विधान परिषद के सदस्य रह चुके Dr. Lalji Prasad Nirmal ने जालौन जिले के एक गांव का नाम ‘चमारी’ होने पर आश्चर्य और आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि आजादी के 79 साल बाद भी इस तरह के नाम का अस्तित्व में बने रहना सामाजिक संवेदनशीलता पर सवाल खड़ा करता है।
डॉ. निर्मल ने कहा कि यह हैरानी की बात है कि जिस गांव का नाम चमारी है, उसी गांव में देश के चर्चित पत्रकार Saurabh Dwivedi भी रहते हैं, लेकिन इस नाम को लेकर कभी व्यापक चर्चा सामने नहीं आई।

MLC dr Lal ji Prasad Nirmal
फाइल फोटो

उन्होंने कहा कि किसी गांव का ऐसा नाम होना केवल एक शब्द का सवाल नहीं है, बल्कि यह सामाजिक सोच और ऐतिहासिक परिस्थितियों को भी दर्शाता है। उनका मानना है कि समय के साथ समाज में संवेदनशीलता और समानता की भावना को मजबूत करने के लिए ऐसे नामों पर पुनर्विचार होना चाहिए।
मुख्यमंत्री से करेंगे मुलाकात
डॉ. निर्मल ने बताया कि उन्हें जानकारी मिली है कि Jalaun के अलावा Unnao जिले में भी ‘चमरौली’ नाम का गांव है। उन्होंने कहा कि वे जल्द ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath से मुलाकात कर इन गांवों के नाम बदलने का आग्रह करेंगे।
उनका कहना है कि ऐसे नामों को बदलकर ऐसे नाम रखे जाने चाहिए जो समाज में समानता, सम्मान और सकारात्मकता का संदेश दें।
गांधी और अम्बेडकर को लेकर भी कही बात
डॉ. निर्मल ने इस मुद्दे को सामाजिक न्याय के व्यापक संदर्भ में रखते हुए कहा कि Mahatma Gandhi और B. R. Ambedkar के बीच एक बड़ा अंतर यह था कि गांधी ने दलित समाज के लिए काम जरूर किया, लेकिन उन्होंने स्वयं दलितों का दर्द नहीं झेला था।
वहीं डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने दलित समाज के दर्द और भेदभाव को खुद अपने जीवन में अनुभव किया और उसी अनुभव के आधार पर सामाजिक न्याय की लड़ाई को आगे बढ़ाया।
सामाजिक संवेदनशीलता की जरूरत
डॉ. निर्मल ने कहा कि समाज में समानता और सम्मान की भावना को मजबूत करने के लिए ऐसे मुद्दों पर संवेदनशीलता जरूरी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इस विषय पर सकारात्मक कदम उठाएगी।

Chautha Prahari
Author: Chautha Prahari

Registration NO. UDYAM -UP-24-0043854

best news portal development company in india
सबसे ज्यादा पड़ गई