लखनऊ, 24 अप्रैल।उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के सेक्टर-11 विकास नगर स्थित टेढ़ी पुलिया क्षेत्र में बीती रात भीषण अग्निकांड ने तबाही का ऐसा मंजर पैदा किया, जिसने हजारों जिंदगियों को झकझोर कर रख दिया। आग इतनी तेजी से फैली कि देखते ही देखते करीब 1455 झुग्गियां जलकर पूरी तरह राख हो गईं और हजारों परिवार बेघर होकर खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग लगते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए, जबकि कई लोग अपने घरों से जरूरी सामान निकालने की कोशिश करते रहे। लेकिन कुछ ही समय में आग ने सब कुछ अपनी चपेट में ले लिया। घर-गृहस्थी का सामान, अनाज, कपड़े और जीवनभर की कमाई पल भर में जलकर खाक हो गई।
राहत कार्य के बीच मानवता की मिसाल-इस भयावह त्रासदी के बीच V Help Foundation ने तुरंत राहत कार्य शुरू कर दिया और प्रभावित परिवारों तक मदद पहुंचानी शुरू की। संस्था ने भोजन, कपड़े और जरूरी सामान उपलब्ध कराने के साथ-साथ राहत शिविरों में सक्रिय भूमिका निभाई।
संस्था के संस्थापक नवेद अहमद खुद मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। उन्होंने सबसे पहले बच्चों की स्थिति को प्राथमिकता देते हुए बड़ा ऐलान किया कि इस आपदा के कारण किसी भी बच्चे की पढ़ाई नहीं रुकने दी जाएगी।
“शिक्षा ही है समाधान”—बच्चों के लिए नई शुरुआत
“आओ बनाएं एक बेहतर कल, शिक्षा ही है इसका हल” के संकल्प के साथ संस्था ने विशेष शिक्षा अभियान शुरू किया है। राहत शिविरों में रह रहे उन बच्चों को चिन्हित किया जा रहा है, जिनकी किताबें, कॉपियां और स्कूल ड्रेस आग में जल गई हैं।
संस्था द्वारा इन बच्चों को मुफ्त किताबें, स्कूल बैग, ड्रेस, जूते और नि:शुल्क ट्यूशन की सुविधा दी जा रही है। “झुग्गी पाठशाला” के माध्यम से उन्हें दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि उनका भविष्य प्रभावित न हो।
फिलहाल प्रभावित परिवार प्रशासन द्वारा बनाए गए अस्थायी राहत शिविरों में रह रहे हैं। हालांकि, भोजन, पानी और अन्य मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था को लेकर अभी भी कई चुनौतियां सामने आ रही हैं। ऐसे में सामाजिक संगठनों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है।
लोगों ने जताया आभार-स्थानीय लोगों और पीड़ित परिवारों ने वी हेल्प फाउंडेशन और उसके संस्थापक के इस मानवीय प्रयास की सराहना की है। लोगों का कहना है कि जब सब कुछ खत्म हो गया था, तब संस्था ने न सिर्फ राहत पहुंचाई बल्कि बच्चों के भविष्य को संवारने का जिम्मा उठाकर पूरे इलाके में उम्मीद की नई किरण जगा दी।
यह घटना एक यह दिखाती है कि आपदा के समय सामाजिक एकजुटता और मानवीय पहल किस तरह से बड़ी से बड़ी त्रासदी में भी उम्मीद की रोशनी जगा सकती है।
Author: Chautha Prahari
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