लखनऊ, 24 अप्रैल। उत्तर प्रदेश में ‘महिला सामर्थ्य’ योजना गांवों की तस्वीर बदल रही है। अवध क्षेत्र के 1500 से ज्यादा गांवों में यह योजना अब मजबूत आधार बन चुकी है। अयोध्या, सुल्तानपुर, रायबरेली, अमेठी, प्रतापगढ़, फतेहपुर और कानपुर नगर में एक लाख से ज्यादा महिलाएं इससे जुड़ चुकी हैं। मकसद साफ है—महिलाओं को कमाई से जोड़ना और गांव की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना।

योजना के तहत महिलाओं को डेयरी से जोड़ा गया है। आज हालत यह है कि हर दिन करीब 4 लाख लीटर दूध का संग्रह हो रहा है। यह सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि गांवों में बढ़ती आर्थिक गतिविधि का संकेत है। अब तक 1380 करोड़ रुपये से ज्यादा सीधे महिलाओं के बैंक खातों में भेजे जा चुके हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार महिलाओं की आर्थिक भागीदारी पर जोर देते रहे हैं। उनका मानना है कि जब महिला कमाएगी तो परिवार मजबूत होगा। यही सोच इस योजना की नींव में है।
अवध के गांवों में अब महिलाएं सिर्फ घर तक सीमित नहीं हैं। वे डेयरी के जरिए नियमित आय कमा रही हैं। इससे न सिर्फ उनका आत्मविश्वास बढ़ा है, बल्कि परिवार की स्थिति भी सुधरी है। गांवों में छोटे स्तर पर शुरू हुआ यह काम अब एक संगठित नेटवर्क का रूप ले चुका है।
इस योजना की शुरुआत मार्च 2023 में 340 गांवों और करीब 8000 महिलाओं के साथ हुई थी। आज यह बढ़कर 1550 गांवों और एक लाख से ज्यादा महिलाओं तक पहुंच गई है। इतने कम समय में हुआ यह विस्तार बताता है कि योजना जमीन पर काम कर रही है, सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं है।
इस योजना की सबसे बड़ी ताकत डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर है। महिलाओं को भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में मिल रहा है। इससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हो गई है। पैसा सीधे मिलने से भरोसा बढ़ा है और महिलाएं ज्यादा सक्रिय हुई हैं।
सुल्तानपुर जिले के मुकुंदपुर गांव की अनीता वर्मा इस बदलाव की साफ मिसाल हैं। उन्होंने दो गायों से काम शुरू किया था। धीरे-धीरे उनका काम बढ़ा और आज वह एक सफल डेयरी व्यवसाय चला रही हैं। पिछले साल उन्हें करीब साढ़े छह लाख रुपये का भुगतान मिला।
अनीता की कहानी अकेली नहीं है। ऐसे कई उदाहरण सामने आ रहे हैं जहां महिलाएं छोटे स्तर से शुरू करके मजबूत आय का जरिया बना रही हैं। यह बदलाव धीरे-धीरे पूरे क्षेत्र में दिख रहा है।
आगे क्या असर पड़ेगा-इस योजना से गांवों में रोजगार के मौके बढ़ेंगे। शहरों की ओर पलायन कम हो सकता है। महिलाओं की आमदनी बढ़ने से बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और जीवन स्तर में सुधार होगा। आने वाले समय में यह डेयरी नेटवर्क और मजबूत हो सकता है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थायी सहारा मिलेगा।
Author: Chautha Prahari
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