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भीषण गर्मी में गो-आश्रय स्थलों के लिए सख्त आदेश: कूलर, मिस्टिंग सिस्टम और चारे की पूरी व्यवस्था जरूरी

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गो-आश्रय स्थल में गर्मी से बचाव के लिए लगाए गए कूलर और पानी की व्यवस्था

लखनऊ, 25 अप्रैल।प्रदेश में तेज गर्मी और लू को देखते हुए योगी सरकार ने सभी गो-आश्रय स्थलों में पशुओं की सुरक्षा को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। सरकार ने साफ कहा है कि कहीं भी लापरवाही नहीं होनी चाहिए। हर हाल में पशुओं को गर्मी से बचाने के इंतजाम तुरंत पूरे किए जाएं। अब देखने वाली बात यह होगी कि इसका असर कितना दिखाई पड़ेगा।

गो-आश्रय स्थल में गर्मी से बचाव के लिए लगाए गए कूलर और पानी की व्यवस्था
सरकार ने आदेश दिया है कि सभी गो-आश्रय स्थलों में वाटर मिस्टिंग सिस्टम, कूलर और पंखे अनिवार्य रूप से लगाए जाएं। साथ ही छाया की पुख्ता व्यवस्था हो और पशुओं को लगातार साफ पानी मिलता रहे। अधिकारियों को नियमित निरीक्षण करने और कमियों को तुरंत ठीक कराने को कहा गया है।
गर्मी के साथ चारे की समस्या को भी सरकार ने गंभीरता से लिया है। निर्देश दिए गए हैं कि हर गो-आश्रय स्थल में हरा चारा और भूसा पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहे। इससे पशुओं के स्वास्थ्य पर असर न पड़े।
पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम ने बताया कि चारागाह भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। खाली कराई गई जमीन पर हाइब्रिड नेपियर घास बोने पर जोर दिया गया है। इससे लंबे समय तक चारे की कमी नहीं होगी। साथ ही गो-आश्रय स्थलों में छायादार पेड़ भी लगाए जा रहे हैं।
जिलों में भी इसको लेकर काम तेज हुआ है। जौनपुर में भूसा दान करने वालों को प्रमाण पत्र दिए गए हैं। आजमगढ़, बागपत, सहारनपुर और हरदोई में मिस्टिंग सिस्टम, कूलर और फॉगर जैसी सुविधाएं लगाई गई हैं।
भूसा दान अभियान में भी लोगों की भागीदारी बढ़ी है। महराजगंज, जौनपुर, बलिया, वाराणसी, एटा, सहारनपुर, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, चित्रकूट और गोरखपुर जैसे 10 जिले इस अभियान में आगे हैं। यहां जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों के सहयोग से गो-आश्रय स्थलों को पर्याप्त भूसा मिल रहा है।
सरकार के इन निर्देशों से गर्मी के मौसम में पशुओं की मौत और बीमारियों का खतरा कम होगा। साथ ही चारे की स्थायी व्यवस्था बनने से भविष्य में गो-आश्रय स्थलों का संचालन बेहतर होगा। अगर निगरानी इसी तरह जारी रही, तो पूरे प्रदेश में पशु संरक्षण की व्यवस्था मजबूत हो सकती है।

Chautha Prahari
Author: Chautha Prahari

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