लखनऊ,16 मई(चौथा प्रहरी)। राजधानी लखनऊ बैंक कर्मचारियों का विरोध अब और तेज होता दिख रहा है। शनिवार को यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) के पदाधिकारी और सदस्य काले कपड़े पहनकर बैंकों में काम करने पहुंचे। यह विरोध 5 दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने और पीएलआई योजना को द्विपक्षीय समझौता प्रणाली के तहत लागू करने की मांग को लेकर किया गया।

यूएफबीयू के जिला संयोजक अनिल श्रीवास्तव ने बताया कि बैंक कर्मचारी लंबे समय से सप्ताह में पांच दिन बैंकिंग व्यवस्था लागू करने की मांग कर रहे हैं। इस मुद्दे पर पहले भी आंदोलन और एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल की जा चुकी है, लेकिन केंद्र सरकार ने अब तक कोई फैसला नहीं लिया है।
फोरम के प्रदेश संयोजक वाई. के. अरोड़ा सहित डी.के. सिंह, एस.के. संगतानी, लक्ष्मण सिंह, मनमोहन दास और संदीप सिंह ने कहा कि भारतीय बैंक संघ पहले ही पांच दिवसीय बैंकिंग पर सहमति दे चुका है। इसके बावजूद केंद्र सरकार की मंजूरी नहीं मिल रही है। नेताओं का आरोप है कि सरकार बैंक कर्मचारियों की मांगों को गंभीरता से नहीं ले रही।
बैंक यूनियन नेताओं वी.के. माथुर, विभाकर कुशवाहा, बी.डी. पाण्डेय, विशाखा वर्मा और स्वाति सिंह ने पीएलआई योजना पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि केंद्र सरकार ने स्केल-4 और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव योजना लागू करने का निर्देश दिया है, जबकि इस पर यूनियनों से सहमति नहीं ली गई। उन्होंने इसे सुलह प्रक्रिया की अनदेखी बताया।
मीडिया प्रभारी अनिल तिवारी ने कहा कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक बैंककर्मी अतिरिक्त सहयोग नहीं करेंगे। उन्होंने साफ कहा कि फोरम की केंद्रीय समिति के निर्देश पर आगे भी हड़ताल और अन्य आंदोलनात्मक कार्यक्रम जारी रह सकते हैं।
बैंक कर्मचारियों के इस विरोध का असर आने वाले दिनों में बैंकिंग सेवाओं पर पड़ सकता है। अगर सरकार और यूनियनों के बीच जल्द सहमति नहीं बनती, तो देशभर में बड़े स्तर पर आंदोलन और हड़ताल देखने को मिल सकती है। इससे ग्राहकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
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