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UP NEWS: यूपी में बसों की होगी अग्नि सुरक्षा जांच, बिना फायर एक्सटिंग्विशर फिटनेस प्रमाणपत्र नहीं मिलेगा

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बस में अग्निशमन यंत्र की जांच करते परिवहन विभाग के अधिकारी की प्रतीकात्मक चित्र

लखनऊ,25जून(चौथा प्रहरी)। उत्तर प्रदेश के परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने प्रदेश भर में चलने वाली स्लीपर बसों, स्कूल बसों, स्टेज कैरिज और कॉन्ट्रैक्ट कैरिज बसों में अग्निशमन यंत्रों की उपलब्धता और उनकी कार्यशीलता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। जुलाई महीने में विशेष अभियान चलाकर जांच की जाएगी। जिन वाहनों में अग्निशमन यंत्र नहीं मिलेगा या वह काम करने की स्थिति में नहीं होगा, उन्हें फिटनेस प्रमाणपत्र जारी नहीं किया जाएगा।

बस में अग्निशमन यंत्र की जांच करते परिवहन विभाग के अधिकारी की प्रतीकात्मक चित्र
लखनऊ में हाल ही में हुई भीषण आग की घटना के बाद परिवहन विभाग ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। मंत्री ने कहा कि हर दिन बड़ी संख्या में लोग बसों से यात्रा करते हैं। ऐसे में किसी भी आपात स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा के लिए अग्निशमन यंत्र का उपलब्ध और कार्यशील होना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय मोटरयान नियमावली 1989 के तहत प्रत्येक पर्यटक वाहन में ड्राई पाउडर टाइप अग्निशमन यंत्र होना अनिवार्य है। यह यंत्र इंजन कक्ष के पास लगाया जाना चाहिए ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत उपयोग किया जा सके।
परिवहन मंत्री ने स्कूल बसों की जांच पर विशेष जोर दिया है। उन्होंने कहा कि 1 जुलाई से प्रदेश के अधिकांश शैक्षणिक संस्थान खुलने जा रहे हैं। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसलिए स्कूल बसों में अग्निशमन यंत्र के साथ अन्य सभी सुरक्षा मानकों का भी सत्यापन किया जाएगा।
जुलाई माह में पूरे प्रदेश में व्यापक जांच अभियान चलाया जाएगा। मोटर वाहन निरीक्षक और एटीएस सेंटर फिटनेस जांच के दौरान अग्निशमन यंत्र की उपलब्धता, क्षमता, वैधता और कार्यशीलता की जांच करेंगे। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि यंत्र निर्धारित समय पर सर्विस और रिफिल कराया गया है या नहीं।
निर्देशों के अनुसार जिन वाहनों में अग्निशमन यंत्र नहीं मिलेगा, उसकी वैधता समाप्त हो चुकी होगी या वह काम करने योग्य नहीं होगा, उन्हें कमियां दूर होने तक फिटनेस प्रमाणपत्र नहीं दिया जाएगा। ऐसे मामलों में नियमानुसार कार्रवाई भी की जाएगी।
परिवहन विभाग के प्रवर्तन अधिकारियों को बस अड्डों, प्रमुख मार्गों, टोल प्लाजा, जनपद सीमाओं और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर सघन जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन मिलने पर मोटरयान अधिनियम 1988 और केंद्रीय मोटरयान नियमावली 1989 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
स्लीपर बसों की जांच के समय आपातकालीन निकास, सुरक्षा हैमर, अग्निशमन यंत्र, विद्युत वायरिंग और अन्य सुरक्षा उपकरणों की भी जांच होगी। वहीं स्कूल बसों में बच्चों की सुरक्षा से जुड़े सभी मानकों का पालन सुनिश्चित कराया जाएगा।
परिवहन मंत्री ने क्षेत्रीय अधिकारियों को बस संचालकों, परिवहन कंपनियों, यूनियन पदाधिकारियों और विद्यालय प्रबंधन को अग्नि सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के निर्देश भी दिए हैं। उनसे कहा गया है कि अग्निशमन यंत्रों का नियमित रखरखाव और समय पर परीक्षण कराया जाए।
इस बीच परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन ने सभी अधिकारियों को आदेश जारी कर दिए हैं। उन्होंने कहा है कि प्रदेश में होने वाली दैनिक कार्रवाई की रिपोर्ट अपर परिवहन आयुक्त (प्रवर्तन) को नियमित रूप से भेजी जाए।
भविष्य का प्रभाव-इस अभियान से प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने की उम्मीद है। खासकर स्कूल बसों और स्लीपर बसों में सुरक्षा मानकों के पालन से दुर्घटना की स्थिति में यात्रियों और विद्यार्थियों की जान बचाने में मदद मिलेगी। साथ ही बस संचालकों पर सुरक्षा नियमों का पालन करने का दबाव भी बढ़ेगा।

VINAY PRAKASH SINGH
Author: VINAY PRAKASH SINGH

Registration NO. UDYAM -UP-24-0043854

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