संवाददाता चौथा प्रहरी
बरेली। पेट दर्द से तड़प रही दो माह की गर्भवती इलाज की उम्मीद लेकर महिला झोलाछाप के पास पहुंची, लेकिन आरोप है कि वहां इलाज के नाम पर ऐसा खेल हुआ कि उसकी जान चली गई। अल्ट्रासाउंड के बाद पेट की सफाई कर दी गई। हालत बिगड़ी तो बरेली के अस्पताल में जांच के दौरान आंत और बच्चेदानी फटने की बात सामने आई। ऑपरेशन के बावजूद महिला को नहीं बचाया जा सका। तीन मासूम बच्चों के सिर से मां का साया उठ गया। इससे भी गंभीर आरोप यह है कि पिता ने थाने से लेकर सीएमओ तक शिकायत की, लेकिन करीब एक महीने तक कार्रवाई नहीं हुई। आखिरकार बुधवार को पीड़ित पिता डीआईजी अजय कुमार साहनी के दरबार में पहुंचा।
बदायूं के बिनावर थाना क्षेत्र के गुझियाना गांव निवासी दीनदयाल के मुताबिक उनकी बेटी पूनम पत्नी बिजेंद्र कुमार मायके आई हुई थी। वह करीब दो माह की गर्भवती थी। अचानक पेट में दर्द होने पर परिवार उसे डॉक्टर को दिखाने की तैयारी कर रहा था। इसी दौरान परिचित ओमपाल ने अपनी रिश्तेदार नीरज के बारे में बताते हुए दावा किया कि वह महिलाओं का इलाज करती है। आरोप है कि नीरज पूनम को बल्लिया में अल्ट्रासाउंड कराने ले गई और इसके बाद उसके पेट की ‘सफाई’ कर दी। इसके बाद पूनम की हालत तेजी से बिगड़ने लगी।
बरेली में डॉक्टरों ने जांच की तो परिजनों के उड़े होश
हालत बिगड़ती देख परिजन नौ जुलाई को पूनम को बरेली के बेगराज अस्पताल लेकर पहुंचे। परिजनों के मुताबिक यहां जांच और अल्ट्रासाउंड के बाद डॉक्टरों ने बताया कि उसकी आंत और बच्चेदानी फट गई है और तत्काल ऑपरेशन की जरूरत है। इसके बाद पूनम को रुहेलखंड अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने ऑपरेशन किया, लेकिन परिजनों के अनुसार तब तक संक्रमण शरीर में फैल चुका था। तमाम प्रयासों के बावजूद पूनम की हालत नहीं सुधरी और 10 जुलाई की रात करीब 8:05 बजे उसने दम तोड़ दिया। पूनम अपने पीछे तीन छोटे बच्चों को छोड़ गई।
बेटी मर गई, फिर भी झोलाछाप पर कार्रवाई नहीं
बेटी की मौत के बाद दीनदयाल ने कार्रवाई के लिए भमोरा पुलिस से गुहार लगाई। उनका आरोप है कि इंस्पेक्टर पवन कुमार सिंह ने उनकी शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें थाने से भगा दिया। करीब एक महीने से वह न्याय के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। पीड़ित परिवार का आरोप है कि शिकायत करने के बाद आरोपी पक्ष की ओर से उन्हें रास्ते में रोककर धमकियां भी दी जा रही हैं। दीनदयाल ने खुद की जान को खतरा बताते हुए सुरक्षा की मांग की है।
CMO से शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
मामले में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पीड़ित पिता दीनदयाल का कहना है कि उसने बेटी की मौत के मामले में सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह से भी शिकायत कर कथित झोलाछाप के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन सीएमओ स्तर से कोई कार्रवाई नहीं हुई। शिकायत के बावजूद न तो कथित झोलाछाप के खिलाफ कोई कदम उठाया गया और न ही पीड़ित परिवार को कार्रवाई की जानकारी दी गई। इस संबंध में सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह का पक्ष जानने के लिए उन्हें फोन किया गया, लेकिन उनका फोन नहीं उठा। वहीं भमोरा इंस्पेक्टर पवन कुमार सिंह से संपर्क किया गया तो उन्होंने फोन काट दिया। ऐसे में दोनों अधिकारियों का पक्ष नहीं मिल सका।
एक महीने बाद DIG के दरबार पहुंचा पिता
थाने और स्वास्थ्य विभाग से कार्रवाई न होने का आरोप लगाते हुए बुधवार को दीनदयाल बरेली रेंज के डीआईजी अजय कुमार साहनी के पास पहुंचे। उन्होंने महिला नीरज और ओमपाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की। साथ ही आरोपियों से अपनी जान को खतरा बताते हुए सुरक्षा की गुहार लगाई। पीड़ित के मुताबिक डीआईजी ने कार्रवाई का भरोसा दिया है। अब सवाल खड़ा हो रहा है कि गर्भवती की मौत जैसे गंभीर मामले में शिकायत के बावजूद पुलिस और स्वास्थ्य विभाग करीब एक महीने तक क्यों खामोश रहे। कथित झोलाछाप के इलाज से महिला की मौत के आरोपों की समय रहते जांच क्यों नहीं कराई गई और जिम्मेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। अब डीआईजी तक मामला पहुंचने के बाद पीड़ित परिवार को उम्मीद है कि शिकायत फाइलों में दबने के बजाय जांच आगे बढ़ेगी और बेटी की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी।




