प्रयागराज,26जून(चौथा प्रहरी)। जिले के सिविल लाइंस थाने में अधिवक्ता सौरभ सोमवंशी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव प्रदीप दुबे के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के लिए तहरीर दी है। तहरीर में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, जालसाजी, कूट रचित दस्तावेज तैयार करने, मिथ्या शपथ पत्र देने, धोखाधड़ी और लोक पद के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। फिलहाल पुलिस की ओर से मुकदमा दर्ज किए जाने की पुष्टि नहीं हुई है।

तहरीर के अनुसार, 11 जनवरी 2011 को जारी एक अधिसूचना के जरिए उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग से विधानसभा कर्मियों की भर्ती का अधिकार तीन सदस्यीय चयन समिति को दिए जाने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि इसके बाद हुई भर्तियां विवादों में रहीं और मामले में सीबीआई जांच के आदेश तक दिए गए थे। उन्होंने इस अधिसूचना को असंवैधानिक और आपराधिक बताया है।
सौरभ सोमवंशी ने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि दिसंबर 2011 से 9 मार्च 2012 के बीच प्रदेश में विधानसभा चुनाव के कारण आदर्श आचार संहिता लागू थी। इसके बावजूद प्रदीप दुबे ने प्रमुख सचिव संसदीय के पद पर रहते हुए स्वयं को विधानसभा के प्रमुख सचिव के पद पर नियुक्त कराया। शिकायतकर्ता का दावा है कि यह कार्रवाई नियमों के विपरीत थी।
तहरीर में यह भी कहा गया है कि तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष सुखदेव राजभर की संस्तुति के आधार पर 6 मार्च 2012 को यह नियुक्ति हुई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उस समय विधानसभा अध्यक्ष अपने निर्वाचन क्षेत्र में मतगणना से जुड़े कार्यक्रम में व्यस्त थे। इसी आधार पर नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं।
अधिवक्ता सौरभ सोमवंशी का कहना है कि इन कथित फैसलों से प्रदेश के बेरोजगार युवाओं के हित प्रभावित हुए। उन्होंने पुलिस से पूरे मामले की जांच कर प्रदीप दुबे के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।
फिलहाल यह शिकायत शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है। समाचार लिखे जाने तक प्रदीप दुबे या उत्तर प्रदेश विधानसभा की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पुलिस की जांच और आगे की कार्रवाई के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
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