योगी सरकार में ठाकुरवाद या फिर आदित्यनाथ का ब्राह्मण प्रेम!
लखनऊ,चौथा प्रहरी 22 नवंबर(सौरभ सोमवंशी)
क्या भारतीय जनता पार्टी का शीर्ष नेतृत्व योगी आदित्यनाथ को आगे कर उत्तर प्रदेश के ठाकुरों का नुकसान कर रही है।
उत्तर प्रदेश में यह चर्चा का विषय है।
समाजवादी पार्टी के ऊपर यादव वाद का आरोप लगाया गया लेकिन यह वास्तविकता है कि समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान यादव जाति की अधिकतर नियुक्ति उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग और पुलिस के अलावा अन्य माध्यम से कई अन्य नौकरियों में की गई वो स्थित उत्तर प्रदेश में राजपूतों के साथ नही है।चौक चौराहे चट्टी और बाजार में यही चर्चा है कि योगी आदित्यनाथ के ठाकुरवाद के फर्जी नैरेटिव में फंसे हुए राजपूतों का फायदा तो कुछ नहीं हुआ लेकिन कल को कोई और मुख्यमंत्री बनेगा तो नुकसान सबसे अधिक राजपूतों का होगा वही टारगेट पर होंगे।उत्तर प्रदेश के कुछ पत्रकार दिनभर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ठाकुरवादी घोषित करने का प्रयास करते रहते हैं। किसी भी जाति का कोई अधिकारी हो यदि उसके नाम के आगे सिंह लगा है तो उसे योगी आदित्यनाथ की बिरादरी का बताकर यह घोषित करने का प्रयास करते हैं कि उत्तर प्रदेश में ठाकुरों की सरकार चल रही है।भले ही देवरिया में 10 दिन के भीतर तीन क्षत्रिय लड़कों की हत्या हो जाती है लेकिन आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती।भले ही अपना दल की नेता और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल के सिर्फ कहने भर से सात राजपूतों के ऊपर बिना जांच पड़ताल के मुकदमा दर्ज हो जाता है।भले ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार के दौरान क्षत्रियों के इतिहास की लानत मलानत की जा रही हो।पृथ्वीराज चौहान व मिहिरभोज को गुर्जर तो वैश राजपूत राजा सुहेलदेव को राजभर बताया जा रहा है।भले ही क्षत्रिय कुल में जन्में भगवान श्री कृष्ण को भारतीय जनता पार्टी एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मिलकर अहीर घोषित करने पर तुले हुए हो ताकि आगे चलकर समाजवादी पार्टी को कटघरे में खड़ा किया जा सके भले ही समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के परिवार से भगवान कृष्ण का दूर-दूर तक कोई संबंध ना हो क्यों कि जहां भगवान कृष्ण क्षत्रिय थे वहीं मुलायम सिंह यादव का परिवार पिछड़ा वर्ग में आता है जो आरक्षण का भी हकदार है।भले ही 31 योगी आदित्यनाथ अपने मन से मुख्य सचिव ने रख पाते हों।सुल्तानपुर में क्षत्रिय लड़के का एनकाउंटर हो जाता हो।भले ही योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्रित्व काल में लोकसभा के टिकट उत्तर प्रदेश में सबसे कम ठाकुरों को दिये जाते हो।भले ही गोरखपुर सीट के सांसद से मुख्यमंत्री बन जाने पर वह सीट पंडित उपेंद्र शुक्ल या फिर रविकिशन शुक्ला को दे दी जाती हो।इतना सब कुछ होने के बावजूद जब योगी आदित्यनाथ जो की अपना घर परिवार और जाति इस कदर छोड़ चुके हैं कि अपने पिता की मृत्यु पर भी वह नहीं जाते हैं उनके ऊपर लगातार ठाकुरवाद का आरोप लगाना हास्यास्पद है इसी बीच में मैं कुछ तथ्यों से आप सबको अवगत कराना चाहता हूं ।आज मैं आपको योगी आदित्यनाथ के ब्राह्मण प्रेम के बारे में बताना चाहता हूं।कैसे चाहे अनचाहे योगी आदित्यनाथ ने पूरे उत्तर प्रदेश में तथाकथित ब्राह्मणवाद फैलाया हुआ है।2017 में मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ के चीफ सेक्रेटरी राजीव कुमार को छोड़ दिया जाए तो पिछले कुछ महीनो तक मुख्य सचिव के पद पर सिर्फ और सिर्फ ब्राह्मण जाति के मुख्य सचिव रहे।चाहे अनूप पांडे हो चाहे आर के तिवारी हों या फिर दुर्गा शंकर मिश्रा।फिलहाल अब गोयल साहब है।दुर्गा शंकर मिश्रा शायद इस देश के इतिहास में किसी प्रदेश के पहले मुख्य सचिव रहे होंगे जिनको रिटायर होने के बाद तीन बार साल साल भर का सेवा विस्तार दिया गया, सोचिए समय से यदि दुर्गा शंकर मिश्रा रिटायर हो जाते तो किसी अधिकारी को मुख्य सचिव बनने का मौका मिलता कहा जाता है जब कोई शख्स देश की सबसे बड़ी परीक्षा पास करके आइएएस बनता है तो उसके बाद उसका सपना चीफ सेक्रेटरी बनने का होता है लेकिन तीन बार के सेवा विस्तार में पता नहीं दुर्गा शंकर मिश्रा ने कितने अधिकारियों के सपनों को चकनाचूर कर दिया कितने अधिकारी इस आस में रिटायर हो गए लेकिन मुख्य सचिव ना बन पाए।जब मनोज कुमार सिंह पिछले साल जुलाई में मुख्य सचिव के पद पर विराजमान हुए तो ठाकुरवाद की हवा चलाई जाने लगी पंखी डुलाई जाने लगी।मुख्यमंत्री कार्यालय के ही अधिकारी तथाकथित रूप से पत्रकारों से पत्रिकाओं में मुख्य सचिव के खिलाफ खबर छपवाते रहे जिसमें उनको भ्रष्टाचारी बताया जाता है।अब आते हैं पंडित अवनीश अवस्थी पर वही अवनीश अवस्थी जो कभी गोरखपुर में जिला अधिकारी हुआ करते थे पंडित अवनीश अवस्थी योगी आदित्यनाथ के अत्यंत करीबी कहे जाते हैं।जब उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने तब अवनीश अवस्थी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर थे लेकिन योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनको लखनऊ लाया गया और वह अपर मुख्य सचिव के तौर पर काम करने लगे। धीरे-धीरे समय बीतता गया।इसी बीच विकास दूबे कांड हुआ उसमें जो कुछ हुआ सब जानते हैं कहता भले ही न कोई हो।अब अवनीश अवस्थी को सितंबर 2022 में रिटायर होना था। पर पंडित अवनीश अवस्थी मुख्यमंत्री के अत्यंत चहेते ठहरे यह तय हो गया की अवनीश अवस्थी की विदाई लगभग तय है लेकिन मुख्यमंत्री ने अपने ब्राह्मण प्रेम के चलते ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया और एक नया पद सृजित किया मुख्य सलाहकार का।ध्यान रहे ये सलाहकार का पद मृत्युंजय कुमार, डीपी सिंह या रहीश सिंह की तरह का नहीं था न ही इसके आगे शिक्षा या फिर सूचना नहीं जुडा था बल्कि ये पद मुख्य सलाहकार का था जो हर तरह के विभाग या किसी भी मामले पर सलाह दे सकता है।कहा जा सकता है कि “पंचम तल का बास”।ठीक वैसे ही जैसे मायावती के समय में शशांक शेखर हुआ करते थे।मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार के पद पर पंडित अवनीश अवस्थी की तैनाती की गई सिर्फ 6 महीने के लिए यानी कि फरवरी 2023 तक के लिए। पर फरवरी 2023 में एक वर्ष के लिए वह कार्यकाल बढ़ा दिया गया।फ़रवरी 2024 तक के लिए लेकिन इसके बाद फिर 2024 में मुख्य सलाहकार अवनीश अवस्थी का कार्यकाल एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया गया ।आप सभी जानते होगे कि मुख्यमंत्री का सलाहकार कितना बड़ा पद होगा।अंदर खाने तो चर्चा ये भी है की मुख्य सचिव से भी ज्यादा ताकतवर है उत्तर प्रदेश के लोक भवन के पंचम तल का मुख्यमंत्री का मुख्य सलाहकार जिस पद पर पंडित अवनीश अवस्थी है। ये वही अवनीश अवस्थी है जो सबसे ताकतवर कहे जाने वाले गृह विभाग के लंबे समय तक एसीएस रहने का रिकॉर्ड बना चुके हैं।अब बात करते हैं उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्रियों की उत्तर प्रदेश सरकार में उत्तर प्रदेश के क्षत्रियों का यह दुर्भाग्य है कि आज की डेट में एक भी कैबिनेट मंत्री क्षत्रिय बिरादरी का नहीं है।ऐसा उत्तर प्रदेश के इतिहास में पहली बार हुआ है।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सबसे पहले अपना मीडिया सलाहकार किसी को बनाया तो पत्रकार से राजनेता बने पंडित शलभमणि त्रिपाठी को वही शलभमणि त्रिपाठी जिनको ट्विटर पर निहाल सिंह हत्याकांड के आरोपियों की गिरफ्तारी न होने पर करारा जवाब देने पर देवरिया जिले के उभरते हुए राजनीतिक सितारे विशाल सिंह की हत्या हो जाती है।अब आते हैं गोरखनाथ मठ पर वहां का प्रमुख कौन है ये सब जानते हैं जब गोरखनाथ मठ की बात आती है तो सबसे पहले लोगों के मन मस्तिष्क में आदरणीय द्वारिका प्रसाद तिवारी जी का नाम आता है।मुख्य पुजारी कमलनाथ जी दलित है।इतना सब कुछ होने के बावजूद यदि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर ठाकुरवाद का आरोप लगाया जाता है तो बड़ा हास्यास्पद लगता है।वास्तविकता यही है कि राजपूतों के एक बड़े वर्ग में यह बात घर कर गई है कि भारतीय जनता पार्टी योगी आदित्यनाथ को आगे करके राजपूतों का बहुत नुकसान कर रहे है।लोग यह भी कहने लगे है कि योगी आदित्यनाथ हमेशा मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे कल को कोई भी मुख्यमंत्री बनेगा तो सबसे ज्यादा नुकसान राजपूतों का होगा।
(आगे उन महानुभाव के बारे में बताउंगा जो 18 साल से उत्तर प्रदेश के महत्वपूर्ण सम्मानित सिंगल पोस्ट पर बैठे हुए हैं और भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा ये है कि सीबीआई जांच का आदेश हुआ लेकिन सुप्रीम कोर्ट से स्टे लेकर घूम रहे हैं और 6 साल से कोई और किसी पद पर बैठा है तो उसके लिए जाति विशेष के लोग अटरिया पर चढ़कर चिल्ला रहे।
Author: Chautha Prahari
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