लखनऊ, 20 जनवरी। 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विधायी संस्थाओं की कार्यप्रणाली में गुणवत्ता के मानक स्थापित करने पर जोर दिया। 21 जनवरी को सम्मेलन का तीसरा एवं अंतिम दिन होगा। इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष समापन संबोधन देंगे। समापन समारोह में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शामिल होंगे तथा सम्मेलन को संबोधित करेंगे।
सम्मेलन के दूसरे दिन तीन प्रमुख विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। पहला, पारदर्शी, कुशल एवं नागरिक-केंद्रित विधायी प्रक्रियाओं हेतु प्रौद्योगिकी का उपयोग। दूसरा, विधायकों की क्षमता-वृद्धि द्वारा कार्यकुशलता में सुधार एवं लोकतांत्रिक शासन को सुदृढ़ करना। और तीसरा, जनता के प्रति विधायिकाओं की जवाबदेही। इन पूर्ण सत्रीय विचार-विमर्शों में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला उपस्थित रहे। राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने चर्चा का संचालन किया।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने देशभर की विधायिकाओं में अपनाई जा रही सर्वोत्तम प्रक्रियाओं को उत्तर प्रदेश विधान सभा की कार्यप्रणाली में समाहित करने के लिए उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना के प्रयासों की प्रशंसा की। श्री बिरला ने विधायकों की शैक्षणिक योग्यताओं एवं पेशेवर अनुभवों को पहचान कर उनका रचनात्मक उपयोग करने की पहल की भी सराहना की।
पूर्व सम्मेलनों के प्रमुख विमर्शों का स्मरण करते हुए श्री बिरला ने उत्कृष्टता, नवाचार तथा प्रौद्योगिकी के उपयोग जैसे मानकों पर राज्य विधायिकाओं के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की आवश्यकता पर बल दिया। इस संदर्भ में देहरादून में 2019 में आयोजित सम्मेलन में हुई चर्चाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने राज्य विधायिकाओं की कार्यकुशलता एवं कार्यप्रणाली में सुधार पर अपने दीर्घकालिक दृष्टिकोण को दोहराया। उन्होंने बताया कि इस दिशा में एक समिति का गठन किया गया है, जो भारत में विधायी निकायों की प्रक्रियाओं एवं प्रथाओं के मानकीकरण से संबंधित मुद्दों पर विचार कर रही है।राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने राज्य विधायिकाओं की कार्यकुशलता में वृद्धि करने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की भूमिका पर बल दिया। साथ ही इस तकनीक को उपयुक्त एवं विश्वसनीय बनाने के लिए अपेक्षित विभिन्न कदमों का भी उल्लेख किया। संसद में एआई के व्यावहारिक उपयोग एवं इसके क्रियान्वयन के विभिन्न तरीकों को रेखांकित करते हुए उन्होंने संसद और राज्य विधायिकाओं के बीच अधिक समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया, जिससे संस्थागत ज्ञान का उपयोग दोनों के द्वारा प्रभावी रूप से किया जा सके।
Author: Chautha Prahari
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