लखनऊ, 3 मार्च। उत्तर प्रदेश में कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीक और संस्थागत समर्थन से जोड़ने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। प्रदेश में 156 पंजीकृत एग्री स्टार्टअप सक्रिय हैं, जो किसानों को क्रेडिट सुविधा, डिजिटल सलाह और बाजार से सीधा संपर्क उपलब्ध करा रहे हैं। इन पहलों को Yogi Adityanath सरकार की कृषि सुधार रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

प्रदेश सरकार कृषि को परंपरागत ढांचे से निकालकर तकनीक आधारित मॉडल से जोड़ने पर जोर दे रही है। स्टार्टअप्स के माध्यम से किसानों को समय पर ऋण, फसल प्रबंधन संबंधी परामर्श और पारदर्शी वित्तीय सेवाएं मिल रही हैं। इससे छोटे और सीमांत किसानों की निर्भरता पारंपरिक साहूकारी व्यवस्था पर कम हुई है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म से बदली खेती की तस्वीर
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म आधारित सेवाओं ने ग्रामीण क्षेत्रों में सूचना की पहुंच आसान बनाई है। मौसम पूर्वानुमान, बीज चयन, उर्वरक सलाह और बाजार मूल्य की जानकारी अब मोबाइल एप और कॉल सेंटर के माध्यम से उपलब्ध है। इससे उत्पादन लागत में कमी और उत्पादकता में वृद्धि की संभावना बढ़ी है।
युवाओं के लिए अवसर, गांवों में बढ़ा स्वरोजगार
राज्य की स्टार्टअप नीति, निवेश प्रोत्साहन और कौशल विकास कार्यक्रमों के जरिए युवाओं को कृषि उद्यमिता की ओर आकर्षित किया जा रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर बढ़े हैं और कृषि को आधुनिक व्यवसाय के रूप में स्थापित करने की दिशा में ठोस कदम उठे हैं।
सरकार का लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाने, कृषि जोखिम कम करने और गांवों को आत्मनिर्भर बनाने पर केंद्रित है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्रेडिट, बाजार संपर्क और तकनीकी परामर्श की यह श्रृंखला मजबूत होती रही तो उत्तर प्रदेश देश की कृषि अर्थव्यवस्था में अग्रणी भूमिका निभा सकता है।
Author: Chautha Prahari
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