लखनऊ, 22 जुलाई(चौथा प्रहरी)। उत्तर प्रदेश में खनन विभाग के राजस्व को लेकर सरकार ने बड़ा दावा किया है। सरकार का कहना है कि पिछले नौ वर्षों में खनन से 30,524 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व मिला है। इसके पीछे अवैध खनन पर कार्रवाई, ई-नीलामी, डिजिटल व्यवस्था और तकनीक आधारित निगरानी को प्रमुख कारण बताया गया है। विभाग के अनुसार इस दौरान 66 स्थानों पर अवैध खनन की पहचान कर कार्रवाई भी की गई।

तकनीक और निगरानी से बदली व्यवस्था-भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग के अनुसार बीते कुछ वर्षों में खनन व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल बनाने पर जोर दिया गया। विभाग ने गूगल अर्थ आधारित निगरानी प्रणाली और विशेष तकनीकी लैब की मदद से अवैध खनन वाले इलाकों की पहचान की। इन कार्रवाइयों से सरकारी राजस्व की वसूली भी हुई और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने की कोशिश की गई।
विभाग का कहना है कि पहले जहां निगरानी काफी हद तक पारंपरिक तरीकों पर निर्भर थी, वहीं अब डिजिटल ट्रैकिंग और ऑनलाइन निगरानी से कार्रवाई तेज हुई है।
पिछले कार्यकाल से तुलना-सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2012 से 2017 के बीच खनन विभाग को करीब 4,700 करोड़ रुपये का राजस्व मिला था। वहीं वर्ष 2017 से 2026 के बीच यह बढ़कर 30,524 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया। सरकार इसे अपनी पारदर्शी व्यवस्था और सख्त निगरानी का परिणाम बता रही है।
ई-नीलामी से बढ़े राजस्व के नए स्रोत-खनन विभाग ने प्रमुख खनिज ब्लॉकों की ई-नीलामी की प्रक्रिया अपनाई। विभाग का दावा है कि इससे आवंटन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी हुई और राजस्व के नए स्रोत तैयार हुए। इसके साथ यूपी माइन मित्र पोर्टल के जरिए खनन से जुड़ी कई सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई गईं। इससे आवेदन और अनुमति की प्रक्रिया पहले की तुलना में आसान और तेज हुई।
अवैध परिवहन पर भी नजर-सरकार ने खनिजों के अवैध परिवहन को रोकने के लिए इंटीग्रेटेड माइनिंग सर्विलांस सिस्टम (IMSS), जियो-फेंसिंग, आरएफआईडी टैग, जीपीएस आधारित वाहन निगरानी, एआई और आईओटी आधारित चेकगेट जैसी तकनीकों का इस्तेमाल शुरू किया है। ई-नोटिस और ऑनलाइन निरीक्षण व्यवस्था भी लागू की गई है ताकि नियमों का पालन बेहतर तरीके से हो सके।
एम-सैंड नीति पर भी जोर-सरकार ने प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव कम करने के लिए एम-सैंड नीति लागू की है। इसका उद्देश्य निर्माण कार्यों में वैकल्पिक सामग्री के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। सरकार का मानना है कि इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ खनन क्षेत्र में संतुलित विकास को भी मदद मिलेगी।
आगे क्या-यदि विभाग की तकनीक आधारित निगरानी और डिजिटल व्यवस्था इसी तरह जारी रहती है तो आने वाले वर्षों में राजस्व बढ़ाने के साथ अवैध खनन पर और प्रभावी नियंत्रण की संभावना है। हालांकि इन दावों की वास्तविक सफलता का आकलन जमीन पर कार्रवाई, पारदर्शिता और स्वतंत्र निगरानी के आधार पर ही होगा।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
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