✍️ सौरभ सोमवंशी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों धार्मिक और राजनीतिक बयानबाजी के बीच नया विवाद खड़ा हो गया है। शंकराचार्य Avimukteshwaranand Saraswati द्वारा मुख्यमंत्री Yogi Adityanath पर लगाए जा रहे आरोपों को लेकर राजनीतिक और धार्मिक हलकों में बहस तेज हो गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय राजनीति में Bharatiya Janata Party की सबसे बड़ी ताकत हिंदुत्व की विचारधारा रही है और इस विचारधारा का सबसे प्रमुख चेहरा वर्तमान समय में योगी आदित्यनाथ को माना जाता है। ऐसे में जब भी योगी आदित्यनाथ पर सीधे हमले होते हैं तो उसे व्यापक राजनीतिक संदर्भ में देखा जाता है।

हाल के दिनों में अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा योगी आदित्यनाथ को लेकर दिए गए बयानों ने विवाद को और गहरा कर दिया है। योगी समर्थकों का कहना है कि यह केवल धार्मिक विवाद नहीं बल्कि इसके पीछे राजनीतिक रणनीति भी हो सकती है।
हिंदुत्व की राजनीति और योगी की भूमिका
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा अक्सर होती रही है कि योगी आदित्यनाथ लंबे समय से Rashtriya Swayamsevak Sangh की विचारधारा से जुड़े रहे हैं और हिंदुत्व की राजनीति में उनकी पहचान एक मुखर नेता के रूप में रही है।
समर्थकों का कहना है कि सनातन और हिंदुत्व के मुद्दों पर योगी आदित्यनाथ लगातार सक्रिय रहे हैं। उनका दिया गया नारा “बटोगे तो कटोगे” भी राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बना था और कई चुनावों में इसकी चर्चा रही।
क्या ब्राह्मण समाज को लेकर राजनीति?
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण समाज की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है। इसलिए जब भी धार्मिक नेतृत्व से जुड़े बयान सामने आते हैं तो उसे सामाजिक समीकरणों से जोड़कर देखा जाता है।
इस बीच अविमुक्तेश्वरानंद और उनके समर्थकों पर यह आरोप भी लगाया जा रहा है कि वे इस विवाद को ब्राह्मण और क्षत्रिय समाज के बीच का विवाद बताने की कोशिश कर रहे हैं।
विपक्ष की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
राजनीतिक चर्चा में यह भी कहा जा रहा है कि विपक्षी दल, विशेष रूप से Akhilesh Yadav की Samajwadi Party और Indian National Congress, इस पूरे विवाद को अपने राजनीतिक दृष्टिकोण से देख रहे हैं। हालांकि इन दलों की ओर से इस मामले पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं।
सूत्रों के अनुसार, इलाहाबाद उच्च न्यायालय में हुई सुनवाई के दौरान अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में बड़ी संख्या में राजनीतिक कार्यकर्ताओं की मौजूदगी भी चर्चा का विषय बनी।
यौन शोषण आरोप और कानूनी विवाद
इस विवाद के बीच अविमुक्तेश्वरानंद पर नाबालिग बटुकों के साथ कथित यौन शोषण से जुड़े आरोपों का मामला भी सामने आया है, जिस पर न्यायालय में सुनवाई चल रही है।
पीड़ित पक्ष की ओर से बहस कर रहीं सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता Reena N. Singh ने कहा कि यदि पुलिस स्तर पर समय से कार्रवाई हो जाती तो मामले को अदालत तक ले जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
उन्होंने यह भी कहा कि नाबालिगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है और ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
राजनीतिक और धार्मिक बहस तेज
इस पूरे घटनाक्रम ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है। एक ओर जहां समर्थक इसे राजनीतिक साजिश बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आलोचक इसे गंभीर आरोपों से जुड़ा मामला बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में अंतिम निर्णय न्यायालय और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही सामने आएगा, लेकिन फिलहाल यह विवाद राजनीतिक और धार्मिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
Author: Chautha Prahari
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