लखनऊ, 24 मार्च।
उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने मंगलवार को मिर्जापुर जिले के पावन विंध्याचल धाम पहुंचकर मां विंध्यवासिनी के दर्शन किए और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, उन्नति और खुशहाली की कामना करते हुए मां से आशीर्वाद प्राप्त किया।
विंध्याचल शक्तिपीठ में दर्शन के बाद उप मुख्यमंत्री ने कहा कि यह धाम देश के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है, जहां विराजमान मां विंध्यवासिनी अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थल आस्था, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम है, जहां आने वाले श्रद्धालुओं को आत्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा की अनुभूति होती है।
उन्होंने मां विंध्यवासिनी को आदिशक्ति का स्वरूप बताते हुए कहा कि देवी अपने भक्तों को हर संकट से उबारती हैं और उन्हें शक्ति, साहस तथा समृद्धि प्रदान करती हैं। प्रदेश के समग्र विकास और जनकल्याण के लिए उन्होंने विशेष रूप से मां से प्रार्थना की।

अपने विंध्याचल प्रवास के दौरान उप मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों का भी दौरा किया। उन्होंने मां काली खोह मंदिर, श्री भैरव नाथ मंदिर और मां अष्टभुजा मंदिर में विधिवत दर्शन-पूजन किया। इन सभी मंदिरों का धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, विंध्याचल क्षेत्र देवी उपासना की पावन त्रिकोण परिक्रमा के लिए प्रसिद्ध है। काली खोह मंदिर में मां काली के उग्र स्वरूप की पूजा की जाती है, जो भक्तों को भय और संकट से मुक्ति दिलाती हैं। वहीं अष्टभुजा मंदिर में मां के दिव्य स्वरूप के दर्शन होते हैं, जो श्रद्धालुओं को आंतरिक शक्ति और शांति प्रदान करते हैं। भैरव नाथ मंदिर में भगवान भैरव की उपासना रक्षक देवता के रूप में की जाती है, जो भक्तों की रक्षा करते हैं और उन्हें साहस प्रदान करते हैं।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि विंध्याचल धाम केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का जीवंत प्रतीक भी है। यहां आने वाले श्रद्धालु न केवल आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करते हैं, बल्कि उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के लिए नई ऊर्जा और प्रेरणा भी मिलती है।
उन्होंने प्रदेशवासियों के लिए मां विंध्यवासिनी से प्रार्थना करते हुए कहा कि सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और उन्नति बनी रहे तथा उत्तर प्रदेश निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर होता रहे।
Author: Chautha Prahari
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