लखनऊ, 25 मार्च। उत्तर प्रदेश में गोशालाओं को अब केवल पशुओं के आश्रय स्थल तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें ग्रामीण अर्थव्यवस्था के मजबूत स्तंभ के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार गोसंरक्षण को आधुनिक तकनीक और रोजगार से जोड़ते हुए एक नए आर्थिक मॉडल की ओर बढ़ रही है।
इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत ‘पंचगव्य वैल्यू चेन’—जिसमें गोमूत्र, गोबर, दूध, दही और घी शामिल हैं—के जरिए 100 से अधिक ऑर्गेनिक उत्पाद तैयार किए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य इन उत्पादों के माध्यम से एक बड़ा ऑर्गेनिक बाजार खड़ा करना है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आय और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

इस योजना की खास बात यह है कि इसमें देश के प्रतिष्ठित संस्थानों की तकनीकी विशेषज्ञता का उपयोग किया जा रहा है। आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर वीके विजय और आईआईटी खड़गपुर के पूर्व छात्र यशराज इस परियोजना में अहम भूमिका निभा रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में गोशालाओं को हाईटेक बनाते हुए बायोगैस प्लांट स्थापित किए जाएंगे, जिनसे बायो-सीएनजी का उत्पादन किया जाएगा।
योजना के पहले चरण में जालौन जिले की गोशालाओं को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां बायोगैस उत्पादन के साथ-साथ जैविक खाद और अन्य पंचगव्य उत्पाद तैयार किए जाएंगे। इस मॉडल की सफलता के बाद इसे पूरे प्रदेश में लागू करने की योजना है।
आईआईटी विशेषज्ञों की टीम न केवल तकनीकी सहायता दे रही है, बल्कि गांवों में जाकर स्थानीय लोगों को प्रशिक्षण भी प्रदान कर रही है। इससे बायोगैस प्लांट के संचालन और उत्पाद निर्माण में ग्रामीण युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित होगी। यह पहल ग्रामीण स्तर पर कौशल विकास को भी बढ़ावा देगी।
वहीं, यशराज और उनकी टीम उत्पादों की ब्रांडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग में सहयोग कर रही है। इससे पंचगव्य उत्पादों को बाजार में बेहतर पहचान और मूल्य मिलने की संभावना है। यह प्रयास छोटे पशुपालकों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद साबित होगा, क्योंकि उन्हें अपने उत्पादों के लिए एक संगठित और लाभकारी बाजार उपलब्ध होगा।
गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार, इस आधुनिक मॉडल के दोहरे लाभ होंगे। एक ओर गोवंश का संरक्षण सुनिश्चित होगा, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के नए स्रोत विकसित होंगे। तकनीक और परंपरा के इस संगम से गांवों में आत्मनिर्भरता का नया मॉडल तैयार किया जा रहा है।
सरकार की इस पहल से न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान होगा। बायो-सीएनजी उत्पादन से पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम होगी और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा।
कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश सरकार की यह योजना गोशालाओं को आर्थिक विकास के केंद्र में बदलने की दिशा में एक बड़ा और दूरदर्शी कदम है। यदि यह मॉडल सफल होता है, तो यह न केवल प्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन सकता है।
Author: Chautha Prahari
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