ऑनलाइन डिलीवरी मैसेज के बावजूद नहीं मिल रहा सिलेंडर, डीजल पर नए नियमों से बढ़ी परेशानी
अयोध्या, 31 मार्च। जनपद में इन दिनों रसोई गैस को लेकर हालात ऐसे बन गए हैं कि आम लोगों के किचन से ज्यादा धुआं अब व्यवस्था पर उठ रहा है। प्रशासन जहां यह दावा कर रहा है कि गैस आपूर्ति में कोई कमी नहीं है, वहीं जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।

शहर के कई इलाकों में उपभोक्ताओं को समय पर गैस सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। स्थिति यह है कि लोगों ने ऑनलाइन बुकिंग कराई, निर्धारित समय सीमा भी पूरी हो गई, मोबाइल पर ‘डिलीवरी हो गई’ का मैसेज भी आ गया और सब्सिडी का पैसा भी खाते में पहुंच गया—लेकिन सिलेंडर अब तक घर नहीं पहुंचा। इससे उपभोक्ताओं में गहरा आक्रोश है और लोगों का भरोसा सिस्टम से उठता जा रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह समस्या सिर्फ आपूर्ति की नहीं बल्कि गैस एजेंसियों की कार्यप्रणाली में गड़बड़ी का परिणाम है। शहर की सबसे बड़ी एजेंसियों में शामिल “शशी गैस एजेंसी” पर सबसे ज्यादा सवाल उठ रहे हैं, जिसके पास उपभोक्ताओं की संख्या भी सबसे अधिक बताई जा रही है। उपभोक्ताओं का कहना है कि एजेंसी स्तर पर ही बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हो रही हैं और प्रशासन की ओर से कोई सख्त कार्रवाई नहीं दिख रही।
इस पूरे मामले में सबसे अहम कड़ी होम डिलीवरी व्यवस्था का कमजोर पड़ना माना जा रहा है। कई इलाकों में डिलीवरी बंद या बेहद सीमित कर दी गई है, जिससे लोगों को खुद सिलेंडर लाने को मजबूर होना पड़ रहा है। इससे बुजुर्गों और महिलाओं को खासा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
जांच में यह भी सामने आया है कि शहर में हो रहे बड़े भंडारों और रसूखदार लोगों के कार्यक्रमों में गैस सिलेंडरों की खपत बढ़ी है, जिससे आम उपभोक्ताओं का हिस्सा प्रभावित हो रहा है। इसके अलावा कुछ होटलों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को भी अनधिकृत रूप से घरेलू गैस सिलेंडर की आपूर्ति किए जाने की बात सामने आ रही है, जो नियमों का सीधा उल्लंघन है।
डीजल पर भी ‘नियम बनाम जरूरत’ का संकट
गैस के बाद अब डीजल को लेकर भी नई परेशानी खड़ी हो गई है। हालांकि पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति अब सामान्य बताई जा रही है, लेकिन आपूर्ति विभाग के एक निर्देश ने नई दिक्कत खड़ी कर दी है।
निर्देश के अनुसार पेट्रोल पंप संचालकों को केन और पीपे में डीजल देने से मना किया गया है। इसका सीधा असर उन उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है जो जनरेटर के लिए डीजल पर निर्भर हैं—जैसे होटल, अस्पताल, ढाबे और कई घर।
अब स्थिति यह है कि पेट्रोल पंप वाले नियमों के कारण डीजल देने में असमर्थ हैं और उपभोक्ता अपनी जरूरतों के लिए भटक रहे हैं। गर्मी के मौसम में बिजली कटौती के बीच जनरेटर चलाना मजबूरी है, लेकिन डीजल न मिलने से यह विकल्प भी संकट में है।
प्रशासन पर उठ रहे सवाल
दोनों ही मामलों में सबसे बड़ा सवाल प्रशासन की भूमिका पर उठ रहा है। अगर गैस की कमी नहीं है, तो उपभोक्ताओं तक सिलेंडर क्यों नहीं पहुंच रहा? और यदि डीजल की आपूर्ति सामान्य है, तो जरूरतमंदों को केन में डीजल लेने से क्यों रोका जा रहा है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि समस्या संसाधनों की नहीं, बल्कि समन्वय और निगरानी की है। जब तक एजेंसियों पर सख्त नियंत्रण और नियमों में व्यवहारिक सुधार नहीं होगा, तब तक आम जनता इसी तरह परेशान होती रहेगी।
अयोध्या में गैस और डीजल की मौजूदा स्थिति यह साफ संकेत दे रही है कि कागजों पर सब कुछ सामान्य होने के बावजूद जमीनी स्तर पर व्यवस्था लड़खड़ा रही है। जरूरत है पारदर्शिता, सख्त निगरानी और जनहित में त्वरित निर्णय की—ताकि ‘दर्द-ए-गैस’ और ‘डीजल की दुविधा’ से लोगों को राहत मिल सके।
Author: Chautha Prahari
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