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लखनऊ में ‘हिन्दू बेटी बचाओ संघर्ष मोर्चा’ का ज्ञापन: महिलाओं की सुरक्षा, फर्जी पहचान और धर्मांतरण पर सख्त कानून की मांग

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लखनऊ( विनय प्रकाश सिंह)19 अप्रैल।
राजधानी लखनऊ में हिन्दू बेटी बचाओ संघर्ष मोर्चा द्वारा महिलाओं की सुरक्षा, फर्जी पहचान और धर्मांतरण से जुड़े मामलों को लेकर एक विस्तृत ज्ञापन प्रशासन को सौंपा गया। इस ज्ञापन में कानून व्यवस्था को और सख्त बनाने, संगठित अपराधों पर कार्रवाई तेज करने और महिलाओं के अधिकारों को सुनिश्चित करने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई है।



लखनऊ में महिला सुरक्षा को लेकर ज्ञापन सौंपते हुए प्रदर्शनकारी
मोर्चा के संयोजकों ने ज्ञापन में कहा कि वर्तमान समय में महिलाओं से जुड़े अपराधों की प्रकृति बदल रही है और कई मामलों में फर्जी पहचान, दस्तावेजों का दुरुपयोग और संगठित नेटवर्क सामने आ रहे हैं। ऐसे में इन अपराधों को Organized Crime की श्रेणी में रखते हुए विशेष जांच एजेंसी (Special Investigation Unit) का गठन आवश्यक है।
फर्जी पहचान और संगठित अपराध पर सख्ती की मांग
ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया कि फर्जी पहचान (Fake Identity) का उपयोग कर महिलाओं को धोखा देने वाले मामलों को गंभीर अपराध घोषित किया जाए। इसके साथ ही ऐसे मामलों में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
मोर्चा ने यह भी मांग की कि फर्जी दस्तावेज बनाने और उनका उपयोग करने वाले गिरोहों पर आर्थिक दंड के साथ-साथ सख्त कानूनी कार्रवाई हो, ताकि इस प्रकार के अपराधों पर प्रभावी रोक लग सके।
परिजनों की जिम्मेदारी और गवाह अनिवार्यता
ज्ञापन में अभिभावकों और परिजनों की जिम्मेदारी तय करने की भी बात कही गई है। इसके अनुसार, यदि कोई मामला संदिग्ध परिस्थितियों में सामने आता है, तो परिजनों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
साथ ही, ऐसे मामलों में गवाहों की अनिवार्यता सुनिश्चित करने का सुझाव दिया गया, ताकि जांच प्रक्रिया मजबूत और पारदर्शी बन सके।
शैक्षणिक संस्थानों और जिम/सैलून पर निगरानी
महिला सुरक्षा के दृष्टिकोण से मोर्चा ने स्कूल, कॉलेज, जिम और सैलून जैसे स्थानों पर निगरानी बढ़ाने की मांग की है। ज्ञापन में सुझाव दिया गया कि इन संस्थानों में कार्य करने वाले कर्मचारियों का पूरा रिकॉर्ड रखा जाए और उनकी पहचान सत्यापित हो।
विवाह के लिए धर्मांतरण पर नियंत्रण
ज्ञापन का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु विवाह के उद्देश्य से किए जाने वाले धर्मांतरण पर नियंत्रण से जुड़ा रहा। इसमें कहा गया कि ऐसे मामलों को विधिक रूप से नियंत्रित किया जाए और महिला को अपने मूल धर्म और रीति-रिवाजों का पालन करने की स्वतंत्रता सुनिश्चित की जाए।
सामाजिक प्रभाव का अध्ययन जरूरी
मोर्चा ने अंतरधार्मिक और अंतरजातीय विवाहों के सामाजिक प्रभाव का अध्ययन करने की भी मांग की है। उनका कहना है कि इससे सामाजिक संतुलन और समरसता बनाए रखने में मदद मिलेगी और भविष्य की नीतियां बेहतर तरीके से बनाई जा सकेंगी।
समान नागरिक संहिता लागू करने की मांग
ज्ञापन में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) लागू करने की भी मांग की गई है, जिससे विवाह और पारिवारिक मामलों में समानता, पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित हो सके।
विदेश भेजी जाने वाली महिलाओं की सुरक्षा
यदि किसी महिला को विवाह, रोजगार या अन्य कारणों से विदेश भेजा जाता है, तो उसके लिए अनिवार्य सत्यापन और निगरानी व्यवस्था बनाने की मांग भी उठाई गई। मोर्चा ने कहा कि इससे मानव तस्करी और शोषण जैसे अपराधों को रोका जा सकता है।
गंभीर जांच और राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि ऐसे मामलों में संभावित संगठित आपराधिक या आतंकी कनेक्शन की गहन जांच की जाए। इससे किसी भी राष्ट्र-विरोधी गतिविधि को समय रहते रोका जा सकेगा।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
मोर्चा के पदाधिकारियों ने प्रशासन से अनुरोध किया कि इस ज्ञापन को मुख्यमंत्री तक पहुंचाया जाए और सभी बिंदुओं पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।
ज्ञापन पर संयोजक अनिता तिवारी, संतोष सिंह, राजेश कुमार सिंह, मन्टू तिवारी, विजय बहादुर, सुनील कुमार अग्रवाल समेत कई पदाधिकारियों के हस्ताक्षर शामिल हैं।

Chautha Prahari
Author: Chautha Prahari

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