लखनऊ,19 जुलाई(चौथा प्रहरी)।उत्तर प्रदेश में ग्रामीण इलाकों की परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना के तहत प्रदेश के 56 जिलों में 215 मिनी बसों का संचालन शुरू हो चुका है। मार्च 2026 में मंजूरी मिलने के बाद कुछ ही महीनों में योजना का दायरा तेजी से बढ़ा है। जिससे ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को काफी सहूलियत भी मिली है।

सरकार का लक्ष्य उन गांवों तक नियमित बस सेवा पहुंचाना है, जहां अब तक सार्वजनिक परिवहन की सुविधा नहीं थी।
इस योजना के जरिए ग्रामीणों का ब्लॉक, तहसील और जिला मुख्यालय तक पहुंचना पहले से आसान होने की उम्मीद है। खासतौर पर छात्र, किसान, मरीज, नौकरीपेशा लोग और छोटे कारोबारी इससे सीधे लाभान्वित होंगे। जिन मार्गों पर राज्य परिवहन निगम की बसें नहीं चलतीं या बहुत कम चलती हैं, वहां निजी संचालकों की मदद से मिनी बसें चलाई जा रही हैं।
परिवहन विभाग के अनुसार योजना के लिए अब तक 1,012 आवेदन मिले हैं। इनमें 858 आवेदकों का चयन किया जा चुका है। पहले चरण में 56 जिलों में 215 मिनी बसें सड़क पर उतर चुकी हैं। विभाग का कहना है कि आने वाले महीनों में बाकी जिलों और नए ग्रामीण मार्गों पर भी बस सेवा शुरू की जाएगी।
जिलों की बात करें तो प्रयागराज में सबसे अधिक 43 बसों का संचालन शुरू हुआ है। इसके बाद मुजफ्फरनगर में 27, झांसी में 19, मथुरा में 18, जौनपुर में 7, हापुड़ में 6, बांदा और एटा में 5-5, मऊ और जालौन में 4-4 तथा बलिया में 3 बसें चल रही हैं। अन्य जिलों में भी चरणबद्ध तरीके से नई बसें जोड़ी जा रही हैं।
योजना केवल परिवहन सुविधा तक सीमित नहीं है। इससे ग्रामीण स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं। बस संचालन में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे चालक, परिचालक और अन्य सहयोगी कार्यों में रोजगार मिलने की संभावना बढ़ी है। स्थानीय स्तर पर परिवहन सेवाओं से छोटे कारोबार को भी गति मिलने की उम्मीद है।
योजना के तहत 15 से 28 सीटों वाली मिनी बसों को संचालन की अनुमति दी गई है। इनमें डीजल, सीएनजी और इलेक्ट्रिक बसें शामिल हैं। एनसीआर क्षेत्र में केवल सीएनजी और इलेक्ट्रिक बसों को ही चलाने की अनुमति होगी। वाहनों की आयु और तकनीकी मानकों के लिए भी अलग नियम तय किए गए हैं, ताकि सेवा सुरक्षित और नियमित बनी रहे।
बस संचालन की निगरानी जिला स्तर पर गठित समिति करेगी। योजना के क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा भी की जाएगी। साथ ही कुछ प्रक्रियाओं को सरल बनाकर बस सेवा शुरू करने में लगने वाला समय कम किया गया है।
भविष्य के निहितार्थ-यदि योजना तय समय पर सभी 75 जिलों और अधिक ग्रामीण मार्गों तक पहुंचती है, तो गांवों की सड़क कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव आ सकता है। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और स्थानीय बाजारों तक पहुंच आसान होगी। साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलने की संभावना है।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
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