लखनऊ,20 जुलाई(चौथा प्रहरी)। उत्तर प्रदेश में पुराने और अनुपयोगी वाहनों को हटाने की मुहिम लगातार आगे बढ़ रही है। राज्य में अब तक 1.95 लाख से अधिक वाहन अधिकृत स्क्रैपिंग केंद्रों के जरिए हटाए जा चुके हैं। सरकार का कहना है कि इस पहल का मकसद सड़कों को सुरक्षित बनाना, प्रदूषण कम करना और आधुनिक परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही स्क्रैपिंग उद्योग में निवेश और रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं।

30 जून 2026 तक प्रदेश में करीब 1.85 लाख निजी और 10 हजार से ज्यादा सरकारी वाहनों का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया गया। यह पूरी प्रक्रिया तय मानकों के अनुसार अधिकृत केंद्रों पर की जा रही है।
राज्य में फिलहाल 101 व्हीकल स्क्रैपिंग फैसिलिटी पंजीकृत हैं। इनमें से 50 केंद्र पूरी तरह संचालित हो चुके हैं। बाकी केंद्रों को भी चरणबद्ध तरीके से शुरू करने की तैयारी चल रही है। जिन जिलों में अभी यह सुविधा नहीं है, वहां निजी निवेश के जरिए नए केंद्र स्थापित करने की योजना पर काम हो रहा है। करीब 30 नए केंद्रों के प्रस्ताव प्रक्रिया में हैं।
पुराने वाहनों की जांच ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) में आधुनिक मशीनों से की जाती है। यदि वाहन तय सुरक्षा और तकनीकी मानकों पर खरा नहीं उतरता, तो उसे पहले अनफिट घोषित किया जाता है। दोबारा जांच में भी असफल रहने पर उसे स्क्रैपिंग के लिए भेजा जाता है। इससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहती है और मानवीय हस्तक्षेप कम होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बहुत पुराने वाहन सड़क दुर्घटनाओं और वायु प्रदूषण की बड़ी वजह बनते हैं। ऐसे वाहनों के हटने से ईंधन की बचत होगी, धुएं का उत्सर्जन कम होगा और सड़कों पर अपेक्षाकृत सुरक्षित वाहन चलेंगे। साथ ही स्क्रैप से निकलने वाली धातु और अन्य सामग्री का दोबारा उपयोग होने से संसाधनों की भी बचत होगी।
नीति के तहत वाहन मालिकों को भी कई लाभ दिए जा रहे हैं। अधिकृत केंद्र पर वाहन जमा करने के बाद मिलने वाले सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट के आधार पर नया वाहन खरीदने पर निजी वाहनों के लिए रोड टैक्स में 15 प्रतिशत तक और व्यावसायिक वाहनों के लिए 10 प्रतिशत तक की छूट मिल सकती है। इसके अलावा वाहन के स्क्रैप मूल्य का भुगतान भी किया जाता है। जरूरत पड़ने पर इस प्रमाणपत्र को तय नियमों के अनुसार दूसरे व्यक्ति को भी हस्तांतरित किया जा सकता है।
इस नीति का असर केवल परिवहन क्षेत्र तक सीमित नहीं है। वाहन स्क्रैपिंग से स्टील, एल्युमिनियम, तांबा, प्लास्टिक और रबर जैसे रीसाइक्लिंग उद्योगों को कच्चा माल मिल रहा है। इससे उत्पादन लागत कम होने की संभावना है। वहीं स्क्रैपिंग केंद्र, लॉजिस्टिक्स, मशीन संचालन, गुणवत्ता जांच और रीसाइक्लिंग से जुड़े क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी बन रहे हैं।
आगे क्या?
आने वाले समय में यदि नए स्क्रैपिंग केंद्र शुरू होते हैं, तो यह सुविधा प्रदेश के अधिक जिलों तक पहुंचेगी। इससे पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को हटाने की रफ्तार बढ़ सकती है। साथ ही वाहन मालिकों के लिए पूरी प्रक्रिया पहले से अधिक आसान और सुलभ होने की उम्मीद है।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
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