ऑटो-अप्रूवल व्यवस्था पर कर्मचारियों ने उठाए सवाल, बोले- जिम्मेदारी साफ हो तभी लागू हो नई व्यवस्था
लखनऊ,20जुलाई(चौथा प्रहरी)। उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग की सेवाओं को पूरी तरह ऑनलाइन और ऑटो-अप्रूवल प्रणाली से जोड़ने की तैयारी के बीच विभाग के कर्मचारियों ने नई व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि यदि दस्तावेजों का सत्यापन विभागीय स्तर पर नहीं होगा, तो किसी भी फर्जी दस्तावेज या गलत जानकारी की जिम्मेदारी कर्मचारियों पर नहीं डाली जानी चाहिए। इस मुद्दे पर लखनऊ में हुई कर्मचारी संघ की बैठक में आंदोलन की चेतावनी भी दी गई।

शनिवार को लखनऊ स्थित संभागीय परिवहन कार्यालय में उत्तर प्रदेश संभागीय परिवहन कर्मचारी संघ की वार्षिक आम सभा आयोजित हुई। इसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए पदाधिकारियों और कर्मचारियों ने नई ऑनलाइन व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा की।
प्रदेश अध्यक्ष किशनचंद ने कहा कि कर्मचारी सरकार के फैसलों का पालन करेंगे, लेकिन जिस प्रक्रिया में उन्हें दस्तावेज देखने और सत्यापन करने का अधिकार ही नहीं होगा, उसमें किसी भी विवाद की जवाबदेही उन पर नहीं डाली जा सकती। उनका कहना था कि यदि ऑनलाइन अपलोड किए गए दस्तावेजों के आधार पर वाहन का ट्रांसफर या अन्य काम हो जाता है और बाद में दस्तावेज फर्जी निकलते हैं, तो कर्मचारी कानूनी कार्रवाई का सामना क्यों करें।
कर्मचारियों ने आशंका जताई कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद दूसरे राज्यों से वाहन हस्तांतरण सहित कई सेवाओं में दस्तावेजों की वास्तविक जांच का अवसर नहीं मिलेगा। ऐसे में भविष्य में किसी न्यायालय या जांच एजेंसी के सामने कर्मचारियों को जवाब देना पड़ सकता है। इसलिए पहले जिम्मेदारियों और अधिकारों का स्पष्ट निर्धारण किया जाए।
बैठक में कर्मचारियों ने लिपिक संवर्ग के लंबित एसीपी मामलों के निस्तारण, रिक्त पदों पर नियुक्ति और लंबे समय से लंबित पुनर्गठन की प्रक्रिया पूरी करने की मांग भी उठाई।
कर्मचारी संघ ने साफ किया कि उसका विरोध डिजिटल व्यवस्था से नहीं है। उनका कहना है कि नई प्रणाली लागू करने से पहले यह तय होना चाहिए कि किसी गलती या फर्जी दस्तावेज की स्थिति में जवाबदेही किसकी होगी। यदि इस पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो कर्मचारी काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। जरूरत पड़ने पर मामला हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने की भी बात कही गई।
क्या है ऑटो-अप्रूवल व्यवस्था?
कई परिवहन सेवाओं को बिना मानवीय हस्तक्षेप के ऑनलाइन मंजूरी देने की योजना।
उद्देश्य सेवाओं को तेज और पारदर्शी बनाना है।
कर्मचारी चाहते हैं कि डिजिटल व्यवस्था के साथ जवाबदेही का स्पष्ट ढांचा भी तय किया जाए।
आगे क्या हो सकता है?
यदि सरकार और कर्मचारी संगठन के बीच जिम्मेदारियों को लेकर सहमति नहीं बनती है, तो परिवहन विभाग में विरोध प्रदर्शन तेज हो सकता है। इससे ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार की प्रक्रिया प्रभावित होने की भी संभावना है। दूसरी ओर, यदि जवाबदेही का स्पष्ट नियम बना दिया जाता है, तो नई व्यवस्था को लागू करना आसान हो सकता है।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
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