लखनऊ, 26 अप्रैल। राजधानी में फर्जी मोटर ट्रेनिंग स्कूलों के खिलाफ आखिरकार सख्ती शुरू हो गई है। रविवार को परिवहन विभाग ने बीकेटी इलाके में एक ऐसे ही फर्जी स्कूल के वाहन को पकड़ लिया, जो बिना किसी वैध कागज के लोगों को ड्राइविंग सिखा रहा था। जांच में सामने आया कि जिस कार से ट्रेनिंग दी जा रही थी, उसका फिटनेस, प्रदूषण और बीमा—तीनों ही लंबे समय से नहीं कराया गया था। इसके बाद विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए वाहन को सीज कर दिया और मामले में आगे की कार्रवाई के लिए पुलिस को सिफारिश भेज दी। इस कार्रवाई के बाद फर्जी मोटर ट्रेनिंग स्कूल संचालकों में हड़कंप मचा हुआ है।

यह कार्रवाई सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) आलोक यादव की टीम ने की। अधिकारियों को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि शहर के कई इलाकों में फर्जी मोटर ट्रेनिंग स्कूल चल रहे हैं। ये स्कूल गलियों और मोहल्लों से संचालित हो रहे हैं और लोगों को अनफिट वाहनों से ड्राइविंग सिखा रहे हैं, जिससे सड़क पर चलने वालों की जान जोखिम में पड़ रही है।
रविवार शाम को जांच के दौरान टीम ने बीकेटी क्षेत्र में एक कार को रोका, जिस पर ‘सिद्धि विनायक मोटर ट्रेनिंग स्कूल’ का बोर्ड लगा हुआ था। पहली नजर में यह एक सामान्य ट्रेनिंग वाहन जैसा लग रहा था, लेकिन जब कागजों की जांच की गई तो सच्चाई सामने आ गई।
जांच में पाया गया कि कार का फिटनेस 5 अगस्त 2024 के बाद से नहीं कराया गया था। प्रदूषण प्रमाण पत्र 15 सितंबर 2024 से खत्म था और बीमा 13 मार्च 2024 से नहीं कराया गया था। यानी वाहन पूरी तरह से नियमों का उल्लंघन करते हुए सड़क पर चल रहा था और उसी से लोगों को ड्राइविंग सिखाई जा रही थी।
मौके पर मौजूद युवक धर्म वर्मा और राजेश गुप्ता ने बताया कि उन्होंने 15 दिन की ड्राइविंग ट्रेनिंग के लिए 3000-3000 रुपये फीस जमा की है। उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि यह कोई फर्जी ट्रेनिंग स्कूल है। उनके अनुसार, जिस वाहन से उन्हें सिखाया जा रहा था, वह निजी वाहन है।
अधिकारियों के अनुसार, यह कार आदर्श कुमार, निवासी राजाजीपुरम के नाम पर पंजीकृत है। जांच में यह भी सामने आया कि ‘सिद्धि विनायक मोटर ट्रेनिंग स्कूल’ नाम का कोई पंजीकरण परिवहन विभाग में मौजूद नहीं है। यानी यह पूरा काम बिना किसी वैध अनुमति के चलाया जा रहा था।
परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ समय से ऐसे फर्जी मोटर ट्रेनिंग स्कूलों की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। कई मामलों में यह भी देखा गया कि बिना फिटनेस और सुरक्षा मानकों के वाहन सड़कों पर उतारे जा रहे हैं। इससे न केवल ट्रेनिंग लेने वाले बल्कि आम लोगों की भी जान खतरे में पड़ रही है।
इसी को देखते हुए विभाग ने अब सख्ती का रुख अपनाया है। अधिकारियों ने साफ कहा है कि ऐसे फर्जी संस्थानों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। जो भी बिना पंजीकरण के ट्रेनिंग देता हुआ पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।
इस कार्रवाई के बाद लखनऊ में फर्जी मोटर ट्रेनिंग स्कूल चलाने वालों में डर का माहौल बन सकता है। परिवहन विभाग अगर इसी तरह नियमित जांच करता रहा, तो ऐसे अवैध धंधों पर काफी हद तक रोक लग सकती है। इससे सड़क सुरक्षा बेहतर होगी और लोगों को सुरक्षित तरीके से ड्राइविंग सीखने का मौका मिलेगा। साथ ही आम लोगों को भी अब सतर्क रहना होगा कि वे केवल पंजीकृत और मान्यता प्राप्त संस्थानों से ही ट्रेनिंग लें।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
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