लखनऊ, 27 अप्रैल। उत्तर प्रदेश सरकार ने जन शिकायतों के निस्तारण को लेकर सख्त फैसला लिया है। अब जनसुनवाई (IGRS) पोर्टल पर बिना मौके की जांच किए कोई भी शिकायत बंद नहीं होगी। हर मामले में संबंधित अधिकारी को फील्ड विजिट करना जरूरी होगा और उसी के आधार पर रिपोर्ट लगानी होगी। यह कदम फर्जी निस्तारण की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद उठाया गया है। सरकार का साफ कहना है कि अब समाधान कागजों में नहीं, जमीन पर दिखना चाहिए। योगी सरकार के सख्ती का कितना असर होगा इसका सभी को इंतज़ार है।
क्या बदला है सिस्टम में

अब तक कई मामलों में यह सामने आया कि अधिकारी बिना मौके पर पहुंचे ही शिकायत का निस्तारण दिखा देते थे। पोर्टल पर मामला बंद हो जाता था, लेकिन असली समस्या वहीं की वहीं रहती थी। इससे लोगों का भरोसा कमजोर हो रहा था।
इस स्थिति को सुधारने के लिए सरकार ने तीन बड़े बदलाव किए हैं-
हर शिकायत पर मौके की जांच अनिवार्य
निस्तारित मामलों की रैंडम जांच
शिकायतकर्ता के फीडबैक को प्राथमिकता
इन बदलावों का सीधा मतलब है कि अब आधे-अधूरे या फर्जी निस्तारण की गुंजाइश कम होगी।
रैंडम जांच से बढ़ेगी पारदर्शिता-सरकार ने तय किया है कि जिन शिकायतों को निस्तारित दिखाया गया है, उनकी भी समय-समय पर अचानक जांच होगी। इससे यह साफ हो सकेगा कि समस्या का असल में समाधान हुआ या सिर्फ औपचारिकता निभाई गई।
अगर जांच में गड़बड़ी मिली तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ सीधी कार्रवाई होगी। इससे सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ेगी और अधिकारी हर मामले को गंभीरता से लेंगे।
लापरवाही पर सख्त रुख-सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि फर्जी रिपोर्ट लगाकर शिकायत बंद करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे मामलों में अनुशासनात्मक कार्रवाई तय है। यह फैसला प्रशासनिक जिम्मेदारी तय करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
अब अधिकारियों को हर रिपोर्ट सोच-समझकर लगानी होगी, क्योंकि किसी भी समय उसकी जांच हो सकती है।
शिकायतकर्ता की राय को अहमियत-जनसुनवाई (IGRS) पोर्टल पर अब शिकायतकर्ता के फीडबैक को भी अहम बनाया गया है। अगर कोई व्यक्ति निस्तारण से संतुष्ट नहीं है, तो वह दोबारा जांच की मांग कर सकता है।
इससे यह सुनिश्चित होगा कि शिकायत सिर्फ कागजों में बंद न हो, बल्कि उसका असली समाधान हो। आम लोगों को इससे सीधा फायदा मिलेगा।
आगे क्या असर पड़ेगा-सरकार के इस फैसले का असर जल्द दिखने की उम्मीद है। अब अधिकारी बिना जांच रिपोर्ट लगाने से बचेंगे और हर शिकायत को गंभीरता से लिया जाएगा।
इससे फर्जी निस्तारण पर रोक लगेगी और प्रशासन पर लोगों का भरोसा मजबूत होगा। शिकायतों के समाधान में पारदर्शिता आएगी और जवाबदेही तय होगी।
कुल मिलाकर, यह कदम जनसुनवाई प्रणाली को ज्यादा प्रभावी और भरोसेमंद बनाने की दिशा में अहम बदलाव है।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
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