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विद्यारम्भं समारोह में नन्हे हाथों ने लिखा पहला अक्षर, माताओं को दिए संस्कार के संदेश

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नर्सरी के बच्चे पहला अक्षर लिखते हुए, विद्यारम्भं समारोह

लखनऊ, 27 अप्रैल। न्यू पब्लिक स्कूल, कृष्णा नगर शाखा में सोमवार को विद्यारम्भं समारोह का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में नर्सरी के बच्चों से पहला अक्षर लिखवाकर उनकी शिक्षा की शुरुआत कराई गई। समारोह का उद्देश्य बच्चों को पारंपरिक तरीके से शिक्षा से जोड़ना और संस्कारों का महत्व समझाना रहा।
विस्तार
कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती की पूजा-अर्चना से हुई। इसके बाद विद्यालय के प्रबंधक जी डी यादव और प्रधानाचार्या ममता श्रीवास्तव ने दीप जलाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। माहौल उत्साह से भरा रहा और बच्चों के साथ उनके अभिभावक भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे।


नर्सरी के बच्चे पहला अक्षर लिखते हुए, विद्यारम्भं समारोह
विद्यालय की अध्यापिकाओं ने छोटे-छोटे बच्चों के हाथ पकड़कर उनसे पहला अक्षर लिखवाया। इस दौरान कई बच्चे भावुक भी दिखे, वहीं अभिभावकों के चेहरे पर खुशी साफ नजर आई। कार्यक्रम का मकसद बच्चों को उनके नाम का पहला अक्षर लिखवाकर शिक्षा की शुरुआत करना और मां सरस्वती का आशीर्वाद लेना था।
प्रबंधक जी डी यादव ने अपने संबोधन में कहा कि पहले के समय में पाटी पूजन की परंपरा थी, उसी को आगे बढ़ाते हुए यह कार्यक्रम किया गया है। उन्होंने खासतौर पर माताओं से अपील की कि वे बच्चों को मोबाइल से दूर रखें और उनमें अच्छे संस्कार डालें। उन्होंने कहा कि बच्चों के संस्कारों की जिम्मेदारी सबसे ज्यादा माता-पिता की होती है और इसमें मां की भूमिका सबसे अहम होती है।
प्रधानाचार्या ममता श्रीवास्तव ने कहा कि बच्चों की पहली गुरु मां होती है, लेकिन शिक्षक भी उतने ही जरूरी हैं। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे स्कूल आकर अपने सुझाव दें, ताकि बच्चों को बेहतर शिक्षा और संस्कार दिए जा सकें।
इस मौके पर कई नन्हे बच्चों ने अपने जीवन का पहला अक्षर लिखा। इनमें आदविक वर्मा, अगस्त्य राना, अमृति वर्मा, आन्वी, आर्या, अथर्व बाजपेई, अयांश बाजपेई, अराधना द्विवेदी समेत कई बच्चों ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम में विद्यालय के डायरेक्टर अंकिता यादव, अध्यापिका सविता शुक्ला, रिचा शर्मा, सुभाष और अन्य स्टाफ मौजूद रहा। बच्चों के साथ उनकी माताएं भी बड़ी संख्या में शामिल हुईं।
भविष्य का प्रभाव-ऐसे कार्यक्रम बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के साथ-साथ भारतीय परंपराओं से भी जोड़ते हैं। इससे बच्चों में शुरुआत से ही सीखने की रुचि बढ़ती है। साथ ही अभिभावकों को भी यह समझ आता है कि शिक्षा के साथ संस्कार देना कितना जरूरी है। आने वाले समय में इस तरह के आयोजन बच्चों के सर्वांगीण विकास में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

VINAY PRAKASH SINGH
Author: VINAY PRAKASH SINGH

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