लखनऊ,12मई(चौथा प्रहरी)। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार अब गोसंरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। प्रदेश के करीब 7,500 गो आश्रय स्थलों को ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर प्रोडक्शन सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे गांवों में बड़े स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलेगा।

लखनऊ में मंगलवार को दी गई जानकारी में उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चल रही योजनाओं का जिक्र करते हुए बताया गया कि प्रदेश में इस समय करीब साढ़े बारह लाख गोवंश गो आश्रय स्थलों में संरक्षित हैं। अब इन्हीं गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी की जा रही है।
गोबर और गोमूत्र से बनेगी जैविक खाद
गो सेवा आयोग के अध्यक्ष Shyam Bihari Gupta ने बताया कि सरकार गोबर और गोमूत्र आधारित प्राकृतिक खेती मॉडल को बढ़ावा दे रही है। योजना के तहत गोबर से जैविक खाद और गोमूत्र से प्राकृतिक कीटनाशक तैयार किए जाएंगे।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक एक गाय से रोजाना करीब 10 किलो गोबर और 5 लीटर गोमूत्र प्राप्त होता है। इन्हीं संसाधनों का उपयोग ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर और अन्य गो आधारित उत्पाद बनाने में किया जाएगा। इससे किसानों की रासायनिक खाद पर निर्भरता कम करने की कोशिश होगी। साथ ही मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने पर भी जोर रहेगा।
2100 करोड़ रुपये का बजट
सरकार ने गोसंरक्षण अभियान के लिए 2000 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इसके अलावा बड़े गोसंरक्षण केंद्रों की स्थापना के लिए अलग से 100 करोड़ रुपये रखे गए हैं। यानी कुल 2100 करोड़ रुपये इस पूरी योजना पर खर्च किए जाएंगे।
प्रदेश में इस समय 155 वृहद गोसंरक्षण केंद्रों का निर्माण भी तेजी से चल रहा है। सरकार की योजना है कि आने वाले समय में हर जिले में कम से कम एक बड़ा आत्मनिर्भर गोसंरक्षण केंद्र बनाया जाए।
महिलाओं और एफपीओ को भी जोड़ा जाएगा
सरकार इस मिशन में महिला स्वयं सहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों यानी एफपीओ की भागीदारी भी बढ़ाने जा रही है। चयनित महिला समूहों को गोवंश की देखभाल, जैविक खाद निर्माण और उत्पाद प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ेगी और गांवों में स्वरोजगार के नए रास्ते खुलेंगे। साथ ही गोसंरक्षण को जनभागीदारी वाला मॉडल बनाने में मदद मिलेगी।
डीबीटी से पशुपालकों को सीधा लाभ
मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत अब तक करीब सवा लाख पशुपालकों को 1.80 लाख से ज्यादा गोवंश दिए जा चुके हैं। सरकार प्रति गोवंश 50 रुपये प्रतिदिन की दर से डीबीटी के जरिए सीधे पशुपालकों के बैंक खातों में पैसा भेज रही है।
सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ी है और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण लगा है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है।
2017 के बाद बदले हालात
गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में गो तस्करी और अवैध बूचड़खानों की घटनाएं चर्चा में रहती थीं। लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अवैध बूचड़खानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई और गोसंरक्षण के क्षेत्र में बड़े स्तर पर काम हुआ।
सरकार का दावा है कि उत्तर प्रदेश अब गोसंरक्षण और प्राकृतिक खेती को साथ लेकर चलने वाला देश का प्रमुख राज्य बनकर उभर रहा है।
भविष्य में क्या असर होगा
अगर यह योजना जमीन पर सफल होती है तो गांवों में जैविक खेती को बढ़ावा मिल सकता है। किसानों की लागत घटाने के साथ ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर बन सकते हैं। साथ ही गोशालाओं को सरकारी सहायता पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय आत्मनिर्भर बनाने में भी मदद मिलेगी।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
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