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कानपुर देहात में 400 करोड़ के जमीन घोटाले पर बड़ा एक्शन, पूर्व एडीएम समेत कंपनियों और बैंक अधिकारियों पर एफआईआर

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कानपुर देहात में जमीन घोटाले पर योगी सरकार का बड़ा कदम

कानपुर देहात,13 मई(चौथा प्रहरी)। उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार और सरकारी जमीन से जुड़े मामलों पर सख्ती जारी है। कानपुर देहात के भोगनीपुर इलाके में करीब 400 करोड़ रुपये के जमीन घोटाले में अब बड़ी कार्रवाई हुई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  के निर्देश पर पूर्व एडीएम, पावर कंपनियों और बैंक अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है।

कानपुर देहात जमीन घोटाले की जांच से जुड़ी सांकेतिक तस्वीर
मामला मूसानगर थाने में दर्ज हुआ है। तहसीलदार प्रिया सिंह की तहरीर पर यह कार्रवाई की गई। आरोप है कि थर्मल पावर प्लांट लगाने के नाम पर दी गई सरकारी और अधिग्रहीत जमीन को नियमों के खिलाफ बैंकों में गिरवी रखकर बड़ा वित्तीय खेल किया गया।
2011 में दी गई थी हजारों एकड़ जमीन
जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2011 में कानपुर देहात के भोगनीपुर क्षेत्र में थर्मल पावर प्रोजेक्ट लगाने के लिए हिमावत पावर और लैन्को अनपरा पावर कंपनियों को करीब 2332 एकड़ जमीन आवंटित की गई थी। यह जमीन चपरघटा, कृपालपुर, भुण्डा, रसूलपुर और भरतौली समेत सात गांवों में फैली हुई थी।
समझौते के तहत कंपनियों को तीन साल के भीतर निर्माण कार्य शुरू कर बिजली उत्पादन करना था। लेकिन 15 साल गुजरने के बाद भी जमीन पर कोई प्रोजेक्ट शुरू नहीं हुआ। सरकारी और अधिग्रहीत जमीन खाली पड़ी रही।
जमीन गिरवी रखकर लिया गया 1500 करोड़ का कर्ज
जांच में सामने आया कि कंपनियों ने जमीन आवंटन की शर्तों का उल्लंघन किया। आरोप है कि सरकारी जमीन को बैंकों में गिरवी रखकर करीब 1500 करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया।
कंपनियों ने न तो बिजलीघर बनाया और न ही बैंक का कर्ज चुकाया। बाद में जब बैंक इस जमीन की नीलामी की तैयारी करने लगे, तब पूरा मामला प्रशासन के संज्ञान में आया।
जांच में पूर्व एडीएम की भूमिका भी सामने आई
जिलाधिकारी कपिल सिंह को शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच कराई गई। जांच में तत्कालीन अपर जिलाधिकारी (भूमि अध्याप्ति) ओ.के. सिंह की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई।
प्रशासन का कहना है कि कंपनियों, बैंक अधिकारियों और कुछ प्रशासनिक अफसरों की मिलीभगत से सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया गया। इसके बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर नीलामी प्रक्रिया पर रोक लगाई गई और जमीन को फिर से सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज कराया गया।
कई धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा
प्रशासन ने इस मामले में दोनों पावर कंपनियों, आईडीबीआई, कैनरा बैंक और पीएनबी के संबंधित अधिकारियों के खिलाफ जालसाजी और साजिश की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है।
अधिकारियों के मुताबिक, जमीन की मौजूदा कीमत सर्किल रेट के हिसाब से 300 करोड़ रुपये से ज्यादा है, जबकि बाजार मूल्य इससे कहीं अधिक बताया जा रहा है।
आगे और बढ़ सकती है कार्रवाई
सरकारी सूत्रों के अनुसार, जांच आगे बढ़ने पर इस मामले में और नाम भी सामने आ सकते हैं। प्रशासन अब यह पता लगाने में जुटा है कि जमीन आवंटन से लेकर बैंक लोन और नीलामी प्रक्रिया तक किन-किन स्तरों पर नियमों की अनदेखी हुई।
योगी सरकार इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का हिस्सा बता रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में गिरफ्तारियां और विभागीय कार्रवाई भी संभव मानी जा रही है।

VINAY PRAKASH SINGH
Author: VINAY PRAKASH SINGH

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