अयोध्या, 03जून(चौथा प्रहरी)। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, अयोध्या को नया कुलपति मिल गया है। प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह को विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया है। इस संबंध में राजभवन की ओर से मंगलवार को आदेश जारी कर दिया गया।
राजभवन ने यह नियुक्ति उच्च न्यायालय के आदेश के क्रम में पहले जारी किए गए नियुक्ति आदेश को बहाल करते हुए की है। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार डॉ. सिंह जल्द ही कार्यभार ग्रहण कर सकते हैं।

डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह देश के जाने-माने कृषि वैज्ञानिकों में गिने जाते हैं। वह भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के अंतर्गत राष्ट्रीय पादप आनुवांशिक संसाधन ब्यूरो, नई दिल्ली तथा भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल में निदेशक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुके हैं। इसके अलावा वह पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति और कृषि विज्ञान संस्थान, बीएचयू वाराणसी के निदेशक भी रह चुके हैं।
डॉ. सिंह का संबंध उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले से है। वह विश्व प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक स्वर्गीय डॉ. महातिम सिंह के पुत्र हैं। उनके पिता भी कृषि शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में बड़ा नाम रहे हैं।
हाल ही में डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह को राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रदान किया था। कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में उनके योगदान को देश और विदेश में सराहा जाता है।
उन्हें “व्हीट मैन ऑफ इंडिया” के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने गेहूं की 60 नई किस्मों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इनमें 10 जैव-संवर्धित किस्में भी शामिल हैं। इसके अलावा जौ की तीन और आलू की एक नई प्रजाति विकसित करने में भी उनका योगदान रहा है।
डॉ. सिंह कई राष्ट्रीय चयन समितियों और राज्य चयन बोर्डों में भी सदस्य रह चुके हैं। वैज्ञानिकों और शिक्षकों की भर्ती से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों में उनकी भूमिका रही है।
उनकी नियुक्ति पर उद्यान एवं वानिकी महाविद्यालय के पूर्व अधिष्ठाता और वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रोफेसर ओ.पी. राव ने शुभकामनाएं दी हैं। विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी आशुतोष सिंह ने बताया कि नवनियुक्त कुलपति आज या अगले कुछ दिनों में विश्वविद्यालय पहुंचकर पदभार ग्रहण कर सकते हैं।
डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह के नेतृत्व से विश्वविद्यालय में कृषि अनुसंधान, नई तकनीकों के विकास और किसानों से जुड़े नवाचारों को नई गति मिलने की उम्मीद है। इससे विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और मजबूत हो सकती है तथा कृषि शिक्षा और शोध को भी लाभ मिलेगा।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
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