अयोध्या, 08जून( चौथा प्रहरी)। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के श्रीराम शोध पीठ संस्थान में सार्वजनिक पुस्तकालयों के बुनियादी ढांचे और प्रबंधन पर केंद्रित पांच दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। कार्यशाला का उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बिजेन्द्र सिंह ने किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि सार्वजनिक पुस्तकालय किसी भी जीवंत समाज की चेतना और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षक होते हैं तथा समाज के अंतिम व्यक्ति तक ज्ञान पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

कार्यशाला “इन्फ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट इन पब्लिक लाइब्रेरीज” विषय पर आयोजित की जा रही है। कार्यक्रम में कला एवं मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो. मृदुला मिश्रा विशिष्ट अतिथि रहीं।
कुलपति डॉ. बिजेन्द्र सिंह ने कहा कि पुस्तकालय किसी भी शिक्षण संस्थान का सूचना केंद्र होता है। विश्वविद्यालयों में शिक्षण और शोध कार्यों की सफलता में पुस्तकालय की अहम भूमिका रहती है। उन्होंने कहा कि डिजिटलीकरण के दौर में सूचना का प्रवाह पहले से कहीं अधिक तेज हो गया है। ऐसे में पुस्तकालयों में आधुनिक तकनीक और सॉफ्टवेयर का उपयोग जरूरी हो गया है।
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के केंद्रीय पुस्तकालय में सॉफ्टग्रंथ, किबो और ड्रिलबीट जैसे सॉफ्टवेयर के माध्यम से 23,500 ई-बुक्स और 13,500 राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय जर्नलों के शोध पत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके अलावा विभिन्न पाठ्यक्रमों से संबंधित दो लाख से अधिक पुस्तकें भी पुस्तकालय में मौजूद हैं। कुलपति ने यह भी घोषणा की कि विश्वविद्यालय के नवीन परिसर में एक मिनी लाइब्रेरी स्थापित की जाएगी, जिससे छात्रों को अध्ययन सामग्री तक आसान पहुंच मिल सकेगी।
उन्होंने कहा कि पुस्तकालय ऐसे स्थान हैं जहां समाज का हर वर्ग बिना किसी भेदभाव के जानकारी और ज्ञान प्राप्त कर सकता है। जरूरत इस बात की है कि विश्वविद्यालयों में उपलब्ध आधुनिक पुस्तकालय सुविधाओं का लाभ सार्वजनिक पुस्तकालयों तक भी पहुंचे, ताकि समाज के अधिक से अधिक लोग इसका फायदा उठा सकें।
विशिष्ट अतिथि प्रो. मृदुला मिश्रा ने कहा कि पुस्तकालय शोधार्थियों, शिक्षकों और छात्रों के लिए मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हैं। यहां केवल पुस्तकें ही नहीं मिलतीं, बल्कि अध्ययन और शोध के लिए आवश्यक दिशा भी प्राप्त होती है।
कार्यशाला के संयोजक प्रो. सिद्धार्थ शुक्ला ने कहा कि 21वीं सदी में पुस्तकालयों की भूमिका बदल चुकी है। अब वे केवल किताबों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कम्युनिटी नॉलेज हब के रूप में विकसित हो रहे हैं। ई-बुक्स, हाई स्पीड इंटरनेट, क्लाउड आधारित लाइब्रेरी मैनेजमेंट सिस्टम और आरएफआईडी तकनीक आज आधुनिक पुस्तकालयों की जरूरत बन चुकी हैं।
कार्यक्रम में पीएम उषा के समन्वयक डॉ. पी.के. द्विवेदी ने बताया कि प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान के तहत विश्वविद्यालय को विशेष अनुदान प्राप्त हुआ है। इस योजना के माध्यम से कार्यशालाओं, शोध, कौशल विकास और पुस्तकालयों के उन्नयन पर काम किया जाएगा।
कार्यशाला का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलन और पुष्प अर्पण के साथ हुआ। पहले दिन कुल 55 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कई शिक्षक, शोधार्थी और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
इस कार्यशाला से सार्वजनिक पुस्तकालयों में आधुनिक तकनीक के उपयोग, बेहतर प्रबंधन और अधिक लोगों तक ज्ञान पहुंचाने की दिशा में नए सुझाव सामने आने की उम्मीद है। इससे भविष्य में पुस्तकालयों को अधिक उपयोगी, सुलभ और तकनीक आधारित बनाने में मदद मिल सकती है।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
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