लखनऊ, 8 जून (चौथा प्रहरी)। उत्तर प्रदेश को मौसम संबंधी सटीक जानकारी देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोमवार को लखनऊ में क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र का शुभारंभ किया। पहले यह केंद्र मौसम विज्ञान केंद्र के रूप में कार्य करता था, जिसे अब क्षेत्रीय स्तर का दर्जा दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे किसानों, आपदा प्रबंधन एजेंसियों और आम लोगों को मौसम की अधिक सटीक और समय पर जानकारी मिल सकेगी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में मौसम पूर्वानुमान और अनुसंधान के क्षेत्र में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश देश की कुल कृषि भूमि का लगभग 11 प्रतिशत हिस्सा रखता है, लेकिन देश के खाद्यान्न उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान देता है। ऐसे में मौसम की सही जानकारी किसानों के लिए बेहद जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अतिवृष्टि, अनावृष्टि, ओलावृष्टि और आकाशीय बिजली जैसी घटनाओं की समय पर जानकारी मिलने से नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है। उन्होंने बताया कि पहले मौसम की भविष्यवाणियां अक्सर गलत साबित होती थीं, लेकिन अब तकनीक के कारण पूर्वानुमान अधिक सटीक हो गए हैं।
सीएम योगी ने 13 मई को आए आंधी-तूफान का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौरान कुछ जिलों में जनधन की हानि हुई थी। समीक्षा के दौरान पता चला कि अर्ली वार्निंग सिस्टम काम कर रहा था, लेकिन स्थानीय स्तर पर सूचना पहुंचाने में कमी रह गई। इसके बाद प्रशासन को सक्रिय किया गया और बाद की आपदाओं में लोगों के मोबाइल फोन पर तीन घंटे पहले अलर्ट पहुंचाया गया। इसका सकारात्मक असर भी देखने को मिला।
उन्होंने सहारनपुर की एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि भारी बारिश के कारण संभावित खतरे से पहले मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की थी। समय रहते श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया।
मुख्यमंत्री ने आकाशीय बिजली से होने वाली मौतों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कुछ वर्ष पहले पूर्वांचल के कई जिलों में हर साल बड़ी संख्या में लोगों की जान जाती थी। अर्ली वार्निंग सिस्टम लागू होने और जागरूकता बढ़ने के बाद इन घटनाओं में काफी कमी आई है। उन्होंने लोगों से मौसम संबंधी चेतावनियों को गंभीरता से लेने की अपील की।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार भविष्य में अपना मौसम संबंधी सेटेलाइट चाहती है। इसके लिए इसरो से भी चर्चा की गई है। उनका मानना है कि उत्तर प्रदेश के लिए अलग सेटेलाइट होने से मौसम की जानकारी और अधिक सटीक मिलेगी, जिसका लाभ खेती और आपदा प्रबंधन दोनों क्षेत्रों को होगा।
मुख्यमंत्री ने जलवायु परिवर्तन पर चिंता जताते हुए कहा कि मौसम चक्र में लगभग एक महीने का बदलाव दिखाई दे रहा है। यदि यह स्थिति जारी रही तो भविष्य में खाद्यान्न उत्पादन पर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि समय पर मौसम की जानकारी और आधुनिक तकनीक का उपयोग इस चुनौती से निपटने में मदद करेगा।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में 450 ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन और 2000 ऑटोमेटिक रेनगेज स्थापित किए जा चुके हैं। इसके अलावा लखनऊ, वाराणसी, आजमगढ़, अलीगढ़ और झांसी में एक्स-बैंड डॉप्लर वेदर राडार लगाए जा रहे हैं। ये उपकरण वर्षा, तापमान, हवा की गति और दिशा सहित कई महत्वपूर्ण आंकड़ों की निगरानी करेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन में 35 से 36 प्रतिशत तक योगदान देने की क्षमता है। इसके लिए खेती को आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक मौसम पूर्वानुमान से जोड़ना जरूरी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मौसम विज्ञान और नई तकनीकों से जुड़े सभी प्रयासों में राज्य सरकार पूरा सहयोग देगी।
कार्यक्रम में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र, क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र नई दिल्ली के प्रमुख डॉ. दुष्मंत रंजन पटनायक और लखनऊ मौसम केंद्र के प्रमुख डॉ. मनीष रमेश रानाल्कर समेत कई अधिकारी मौजूद रहे।
क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र की स्थापना से उत्तर प्रदेश में मौसम पूर्वानुमान व्यवस्था और मजबूत होगी। इसका सीधा लाभ किसानों, आपदा प्रबंधन एजेंसियों और आम नागरिकों को मिलेगा। साथ ही राज्य में कृषि उत्पादन बढ़ाने और प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
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