लखनऊ, 13 जून( चौथा प्रहरी)। प्रदेश में चल रहे 100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने रफ्तार बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। अपर मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित कुमार घोष ने कहा है कि जिन जिलों में टीबी के लिहाज से हाई रिस्क गांव ज्यादा हैं, वहां प्राथमिकता के आधार पर आयुष्मान आरोग्य शिविर लगाए जाएं। उनका लक्ष्य है कि अभियान खत्म होने से पहले सभी गांवों तक स्वास्थ्य विभाग की टीमें पहुंचें और जांच का काम पूरा हो।

शुक्रवार को अभियान की समीक्षा बैठक के दौरान अमित कुमार घोष ने अधिकारियों को अगले 18 दिन बेहद गंभीरता से काम करने को कहा। समीक्षा में सामने आया कि आजमगढ़, जौनपुर, बस्ती और सिद्धार्थनगर में हाई रिस्क गांवों का कवरेज करीब 36 प्रतिशत ही हो पाया है। वहीं देवरिया और कुशीनगर में भी प्रगति औसत से कम रही है।
उन्होंने कहा कि अब अभियान के केवल 18 दिन बचे हैं। ऐसे में इन जिलों में आयुष्मान आरोग्य शिविरों की संख्या बढ़ाई जाए और स्वास्थ्य विभाग की गतिविधियों में तेजी लाई जाए, ताकि सभी गांवों में स्क्रीनिंग और जांच का काम पूरा हो सके।
बैठक में अपर मुख्य सचिव ने यह भी निर्देश दिया कि सभी टीबी मरीजों को पोषण पोटली उपलब्ध कराई जाए। इसके लिए स्थानीय उद्योगपतियों, व्यापारियों और कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) फंड का सहयोग लेने को कहा गया। साथ ही टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट (टीपीटी) और मरीजों की जरूरत के अनुसार बेहतर देखभाल की व्यवस्था बढ़ाने पर जोर दिया गया।
अमित कुमार घोष ने प्रदेश के करीब एक हजार टीबी विजेताओं और फ्रंटलाइन वर्करों से भी संवाद किया। उन्होंने कहा कि टीबी से लड़ाई में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी मरीजों को टीबी मुक्त भारत एप डाउनलोड कराने के निर्देश दिए, ताकि मरीज अपनी रोजाना की स्वास्थ्य स्थिति दर्ज कर सकें और इलाज की निगरानी बेहतर तरीके से हो सके।
समीक्षा बैठक में राज्य क्षय रोग अधिकारी डॉ. ऋषि कुमार सक्सेना ने अभियान की प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश के जिलों को हाई रिस्क गांवों की संख्या के आधार पर चार श्रेणियों में बांटा गया है। प्रदेश में कुल 26,722 हाई रिस्क गांव चिन्हित किए गए हैं। इनमें से 17,741 गांवों में अब तक आरोग्य शिविर लगाए जा चुके हैं।
उन्होंने बताया कि प्रयागराज, गोरखपुर और बिजनौर जैसे बड़े जिलों में अच्छा प्रदर्शन देखने को मिला है। वहीं आजमगढ़, जौनपुर, बस्ती, सिद्धार्थनगर और गाजीपुर में अभी और प्रयास करने की जरूरत है। इस पर अपर मुख्य सचिव ने संबंधित जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को प्रतिदिन जिला क्षय रोग अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करने के निर्देश दिए।
प्रदेश के कई जिलों ने अभियान में शत-प्रतिशत कवरेज हासिल कर लिया है। गौतमबुद्ध नगर, बागपत, गाजियाबाद, हापुड़, शामली, मेरठ, झांसी, रामपुर, कन्नौज, आगरा, कानपुर नगर, बुलंदशहर और सहारनपुर में स्वास्थ्य टीमें सभी हाई रिस्क गांवों तक पहुंचकर जांच का काम पूरा कर चुकी हैं।
बैठक में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मिशन निदेशक डॉ. पिंकी जोवेल, स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. पवन कुमार अरुण, महानिदेशक परिवार कल्याण डॉ. एचडी अग्रवाल समेत सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारी और जिला क्षय रोग अधिकारी मौजूद रहे।
भविष्य पर असर
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि अभियान के अंतिम चरण में तेजी लाकर अधिक से अधिक लोगों की जांच की जा सकेगी। इससे टीबी के नए मरीजों की समय पर पहचान होगी और इलाज शुरू कराया जा सकेगा। यदि सभी हाई रिस्क गांवों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच जाती हैं तो प्रदेश के टीबी मुक्त भारत अभियान को बड़ी मजबूती मिलेगी।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
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