नई दिल्ली, 02अगस्त(चौथा प्रहरी)। अवसाद यानी डिप्रेशन को आज भी समाज का बड़ा हिस्सा गलत नजर से देखता है। कई लोग इसे कमजोरी, आलस या इच्छाशक्ति की कमी मान लेते हैं। यही सोच कई बार मरीज को समय पर मदद मिलने से रोक देती है। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अवसाद मस्तिष्क से जुड़ी एक बीमारी है। इसका इलाज संभव है और समय रहते उपचार मिलने पर मरीज सामान्य जीवन जी सकता है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि हर व्यक्ति कभी न कभी तनाव, दुख या चिंता का सामना करता है। लेकिन जब उदासी, निराशा, थकान, किसी काम में रुचि खत्म होना, नींद या भूख में बदलाव और जीवन से उम्मीद खत्म होने जैसी समस्याएं लंबे समय तक बनी रहें, तो इसे सामान्य तनाव नहीं माना जाना चाहिए। ऐसे समय में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी होता है।
अवसाद का संबंध मस्तिष्क में काम करने वाले कुछ रसायनों के संतुलन से भी माना जाता है। यही कारण है कि कई बार बिना किसी बड़ी घटना के भी व्यक्ति गहरे अवसाद में जा सकता है। इसलिए किसी भी मरीज को उसकी स्थिति के लिए दोष देना या उसका मजाक उड़ाना ठीक नहीं है।
डॉक्टरों के अनुसार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, संतुलित भोजन, ध्यान और परिवार का सहयोग मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं। हालांकि यदि लक्षण लगातार बने रहें तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय मनोचिकित्सक या क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट से मिलना चाहिए। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर दवाएं और काउंसलिंग की सलाह देते हैं। दवा हमेशा योग्य चिकित्सक की सलाह पर ही लेनी चाहिए।
विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि अवसाद के दौरान शराब या अन्य नशे का सेवन स्थिति को और गंभीर बना सकता है। नशा कुछ समय के लिए राहत का भ्रम देता है, लेकिन इससे निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है और जोखिम बढ़ सकता है।
परिवार और दोस्तों की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि कोई व्यक्ति लगातार उदास दिख रहा हो, खुद को सबसे अलग कर रहा हो या निराशा भरी बातें कर रहा हो, तो उसे “खुश रहो” या “ज्यादा मत सोचो” जैसी बातें कहने के बजाय धैर्य से उसकी बात सुननी चाहिए। उसे भरोसा दिलाना चाहिए कि वह अकेला नहीं है और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ से मिलने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
आगे क्या असर होगा?
मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ने से लोग समय रहते इलाज तक पहुंच सकते हैं। इससे आत्महत्या के मामलों में कमी लाने में भी मदद मिल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अवसाद को छिपाने के बजाय उसे बीमारी मानकर उपचार कराना ही सबसे बड़ा कदम है।
महत्वपूर्ण:- यदि किसी व्यक्ति के मन में खुद को नुकसान पहुंचाने के विचार आ रहे हों, तो इसे आपात स्थिति मानें। परिवार के सदस्य तुरंत उसके साथ रहें और बिना देर किए नजदीकी मनोचिकित्सक, अस्पताल या आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा से संपर्क करें।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
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